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सरला माहेश्वरी: गुजराती साड़ी और बड़ी बिंदी वाली भरोसे की आवाज, जिसने भारत को दी थी राजीव गांधी की हत्या की खबर

Sarla Maheshwari: सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. जानें क्या था 1980 के दशक का रात साढ़े आठ बजे का जादू और शालीनता और विनम्रता की साक्षात मूर्ति सरला माहेश्वरी की कहानी.

सरला माहेश्वरी: गुजराती साड़ी और बड़ी बिंदी वाली भरोसे की आवाज, जिसने भारत को दी थी राजीव गांधी की हत्या की खबर
Sarla Maheshwari passes away: दूरदर्शन की मशहूर एंकर सरला माहेश्वरी का निधन
  • सरला माहेश्वरी ने 1976 में दूरदर्शन में बतौर न्यूज एनाउंसर करियर की शुरुआत की थी.
  • सरला माहेश्वरी 2005 तक दूरदर्शन से जुड़ी रहीं.
  • सरला माहेश्वरी का 71 साल की उम्र में निधन.
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बात 1980 के दशक की है. ना तो जिंदगी में इंटरनेट का दखल हुआ था और ना ही सैटेलाइट चैनल की दस्तक. मनोरंजन और ज्ञान की दुनिया का रास्ता ऑल इंडिया रेडियो या फिर दूरदर्शन से होकर ही गुजरता था. रेडियो पर हवा महल से लेकर टीवी पर चित्रहार तक, एक अलग ही दुनिया थी. इनमें एक दुनिया ऐसी भी थी जिसमें बात होती थी खबरों की. ऐसी खबरें जो शोर-शराबे और चिल्लाहट से दूर की बात हुआ करती थीं. जिनमें समाचार वाचक की आवाज और शब्दों का उच्चारण बहुत मायने रखता था. फिर जिस तरह से ये लोग खबरें पढ़ते थे, तो घंटों इन खबरों को सुना जा सकता था. 

सरला माहेश्वरी: शालीनता और विनम्रता की साक्षात मूर्ति 

खबरों की इसी दुनिया में एक चेहरा ऐसा था जिसे लेकर उनके साथ एंकर रहे शम्मी नारंग कहते हैं 'वे शालीनता और विनम्रता की साक्षात मूर्ति थीं. भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वे ज्ञान का भंडार थीं.' यहां बात हो रही है सरला माहेश्वरी की. जिन्हें माथे पर उनकी बालों में बीच की मांग, बड़ी बिंदी और सीधे पल्ले वाली गुजराती साड़ी के साथ ही चेहरे पर विनम्रता के लिए पहचाना जाता था. जब रात साढ़े आठ बजे वे दूरदर्शन पर खबरें पढ़ने आती थीं, तो उस जमाने में लोग अपना काम-काज छोड़कर न्यूज सुनने बैठ जाते थे. फिर बैठे भी क्यों ना? उस दौर में समाचारों का देखने का माध्यम यही दूरदर्शन था और इन खबरों को बहुत ही निष्पक्ष से पढ़ने और दर्शकों के साथ कनेक्शन बनाने का श्रेय सरला माहेश्वरी जैसे समाचार वाचकों को ही जाती है.

सरला माहेश्वरी: एनाउंसर से न्यूज एंकर तक

लेकिन 12 फरवरी को सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उन्होंने दूरदर्शन के साथ अपने करियर की शुरुआत 1976 में की थी. जब उन्होंने दूरदर्शन में बतौर न्यूज एनाउंसर जॉइन किया तो उस समय वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही थी. इसके बाद वह न्यूज एंकर बन गईं और 1984 तक वह दूरदर्शन से जुड़ी रहीं. बताया जाता है कि इसके बाद उन्होंने दूरदर्शन छोड़ दिया. वे यूके चली गईं और वहीं बीबीसी के साथ जुड़ गईं. इसके बाद वह 1988 में वापस भारत लौटीं और दूरदर्शन के साथ जुड़ गईं. 

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सरला माहेश्वरी: ब्लैक ऐंड व्हाइट से कलर तक

सरला माहेश्वरी उस टीम का हिस्सा थीं जब दूरदर्शन ब्लैक एंड व्हाइट से कलर में बदला. 1982 में दिल्ली एशियाड के दौरान भारत के पहले रंगीन टीवी प्रसारण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही. यह एक ऐसा क्षण था जिसने पूरे देश को रंगीन टीवी का अनुभव दिया. विशेष बुलेटिन और महत्वपूर्ण घटनाओं की कवरेज की बात करें तो उन्होंने खुद बताया था कि उस दौर की बड़ी घटनाएं जैसे राजीव गांधी की हत्या (1991) को उन्होंने दूरदर्शन पर पढ़ा था.

सरला माहेश्वरी: वो 'नमस्कार'

रोजाना हिंदी समाचार बुलेटिन की सबसे लोकप्रिय न्यूज एंकर थीं. लोग खासकर उनके सटीक उच्चारण, संयमित लहजे और विनम्र 'नमस्कार' के लिए इंतजार करते थे. कई लोग तो उनके उच्चारण को सुनकर अपना उच्चारण सुधारने की कोशिश करते थे. सरला माहेश्वरी 2005 तक दूरदर्शन के साथ रहीं. बेशक आज वो चली गईं हैं, लेकिन उनका नमस्कार कहना और वो चेहरा हमेशा जेहन में रहेंगे और उनके बारे में यही कहा जा सकता है कि वह आवाज जो खबरों को नहीं, बल्कि भरोसे को आवाज देती थी.

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