Dharali Disaster Reason
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न बादल फटा, न ग्लेशियर टूटा, ISRO की नई रिपोर्ट में धराली जलप्रलय की असल वजह आई सामने
- Friday March 6, 2026
- Reported by: किशोर रावत, पल्लव बागला, Edited by: प्रभांशु रंजन
ISRO की रिपोर्ट में बताया गया कि ग्लेशियर से 0.25 वर्ग किमी क्षेत्र करीब 75 हजार घन मीटर बर्फ और मलबा 1.7 किलोमीटर नीचे टूटकर गिरा. यानी 69 लाख किलो बर्फ नीचे ढलान की तरफ गिरी और तेज घर्षण के साथ वह पानी में तब्दील होती चली गई. रिपोर्ट के मुताबिक ऊपर से नीचे गिरने के कारण स्पीड इतनी थी कि खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में मौजूद भारी मलबा तेजी से धराली की तरफ आया, जिसने भारी तबाही मचाई.
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केदारनाथ से धराली तक... उत्तराखंड की अनसुनी चेतावनियां और पहाड़ों की बढ़ती आपदाएं, जानें असली वजह
- Thursday August 7, 2025
- Written by: मनोज शर्मा
उत्तराखंड के धराली की आपदा ने हिमालयी क्षेत्र की नाजुकता को फिर से उजागर किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना एक गंभीर चेतावनी है, जिसे अनदेखा किया गया तो आगे और भी बड़ी तबाही हो सकती है.
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Dharali Disaster: धराली में बादल नहीं फटा... तो फिर कैसे आया मलबे का सैलाब? एक्सपर्ट बता रहे वजह
- Thursday August 7, 2025
- Reported by: भाषा, Edited by: प्रभांशु रंजन
बादल फटने की घटना से आशय 20 से 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली चमकने के बीच 100 मिलीमीटर प्रति घंटे से अधिक की दर से बारिश होने से है. जो धराली में नहीं हुआ था. फिर वहां इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ?
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न बादल फटा, न ग्लेशियर टूटा, ISRO की नई रिपोर्ट में धराली जलप्रलय की असल वजह आई सामने
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ISRO की रिपोर्ट में बताया गया कि ग्लेशियर से 0.25 वर्ग किमी क्षेत्र करीब 75 हजार घन मीटर बर्फ और मलबा 1.7 किलोमीटर नीचे टूटकर गिरा. यानी 69 लाख किलो बर्फ नीचे ढलान की तरफ गिरी और तेज घर्षण के साथ वह पानी में तब्दील होती चली गई. रिपोर्ट के मुताबिक ऊपर से नीचे गिरने के कारण स्पीड इतनी थी कि खीर गंगा के कैचमेंट एरिया में मौजूद भारी मलबा तेजी से धराली की तरफ आया, जिसने भारी तबाही मचाई.
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बादल फटने की घटना से आशय 20 से 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली चमकने के बीच 100 मिलीमीटर प्रति घंटे से अधिक की दर से बारिश होने से है. जो धराली में नहीं हुआ था. फिर वहां इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ?
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