टीवी से बॉलीवुड का सफर तय करने वाले एक्टर रोहित रॉय के हाल ही में बोल बिगड़ गए जब उन्होंने कहा कि टीवी डस्टबिन मीडियम है. इस पर टीवी एक्टर्स का तीखा रूख देखने को मिल रहा है. जहां मंगल लक्ष्मी एक्टर नमन शौ ने उनके कमेंट पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि उनके दिमाग में बहुत सारा बोटॉक्स जमा हो गया है और जम गया है तो वहीं एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने कहा कि वह जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. इसके अलावा कई एक्टर्स ने रोहित रॉय के टीवी को कूड़ेदान कहने पर अपना गुस्सा जाहिर किया है.
रोहित रॉय पर भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी
देवोलीना भट्टाचार्जी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, जिस हाथ ने उन्हें खिलाया-पिलाया, उसी को काटना. जिस थाली में खाया, उसी में छेद करना. उनकी बातें बिल्कुल वैसी ही लग रही हैं. फिल्मों की तो बात ही छोड़िए, सच कहूं तो मुझे याद भी नहीं कि वह किस टीवी सीरीज में थे. सच कहूं तो, ज्यादातर लोग उन्हें सिर्फ रोनित रॉय के भाई के तौर पर जानते हैं. रोनित, जिन्होंने टीवी से ही पॉपुलैरिटी हासिल की. मुझे लगता है कि यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है. मुझे तो यह भी नहीं पता कि रोहित का अपना कितना बड़ा योगदान रहा है. अगर टीवी इतना ही बुरा था, तो उन्होंने इतने सालों तक इसका हिस्सा बनने का फैसला क्यों किया? और अब वह उसी माध्यम को 'डस्टबिन' कह रहे हैं."
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उन्होंने आगे कहा, "साथ ही, मुझे लगता है कि उनकी टिप्पणी उन सभी बॉलीवुड एक्टर्स पर है, जो आजकल टीवी पर नजर आते हैं. आज हर बड़ा बॉलीवुड स्टार अपनी फिल्मों को प्रमोट करने, रियलिटी शो होस्ट करने और दर्शकों से जुड़े रहने के लिए टीवी पर आते हैं. क्या वह यह कहना चाह रहे हैं कि वे सभी 'डस्टबिन मीडियम' में काम कर रहे हैं? यह बस उस इंडस्ट्री को नीचा दिखाकर ध्यान खींचने की एक हताश कोशिश लगती है जिसने उन्हें बनाया है. यह मेरा घर है. इसने मुझे सब कुछ दिया है - काम, पहचान, सम्मान और करियर. आज मैं जो कुछ भी हूं, टीवी की वजह से हूं. मुझे इसका हिस्सा होने पर हमेशा गर्व और कृतज्ञता महसूस होगी."
नमन शॉ ने कही ये बात
रोहित रॉय के बयान पर मंगल लक्ष्मी एक्टर नमन शॉ ने कहा, "मुझे सच में लगता है कि शायद बहुत ज्यादा बोटोक्स उनके सिर की पहली परत से आगे बढ़कर सीधे उनके दिमाग में पहुंच गया है और उसे जमा दिया है. टीवी को 'डस्टबिन मीडियम' कहना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह बहुत बड़ा पाखंड भी है, खासकर तब जब यह माध्यम खुद उनके जीवन और रोजी-रोटी का लगभग दो दशकों से हिस्सा रहा हो. अगर टीवी सच में इतना बुरा माध्यम था, तो उन्होंने पिछले 20 सालों तक इसका हिस्सा बने रहना क्यों चुना? हमें यह भी याद रखना चाहिए कि यही वह मीडियम था, जिसने उनके भाई, रोनित दादा को वापसी का मौका दिया."
रोहित रॉय के इस बयान पर बढ़ा विवाद
जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि किंडल कास्ट से बात करते हुए जब रोहित रॉय से पूछा गया कि क्या टीवी इंडस्ट्री ज्यादा प्रोफेशनल हो गई है तो उन्होंने कहा, मुझसे कई बार यह सवाल पूछा गया. कभी कभी मुझे लगता है कि मुझे एहसान फरामोश जैसा नहीं लगना चाहिए. लेकिन टीवी एक डस्टबिन मीडियम है. आप इसे आज देखते हैं जैसे कल का अखबार हो. कल इसे आप भूल जाते हैं. दुर्भाग्य से इंडिया में जिस तरह का कंटेंट बनाया जा रहा है शायद ही उसमें कोई क्रिएटिविटी हो. सच कहूं तो टीवी आर्टिस्ट का वह अंदाज नहीं होता जो फिल्म आर्टिस्ट में होता है. मूवी स्टार्स शानदार, स्टाइलिश और कूल छवि बनाते हैं. वहीं उन्होंने टीवी आर्टिस्ट को लेकर कहा कि उनमें सब्र की कमी होती है.
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