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राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में बयां किया दर्द, '17 करोड़ रुपए डूब चुके, जब चाहे, जहां भेज दें, मैं तैयार हूं'

16 साल पुराने चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को बचे हुए पैसे जमा करने के लिए लगाई फटकार. सुनवाई के दौरान राजपाल ने कहा कि 16 साल के करियर में 250 फिल्में कीं, लेकिन अपनी फिल्म अता पता लापता में करोड़ों रुपये गंवा दिए.

राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में बयां किया दर्द, '17 करोड़ रुपए डूब चुके, जब चाहे, जहां भेज दें, मैं तैयार हूं'
चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए राजपाल यादव
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नई दिल्ली:

राजपाल यादव इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा चेक बाउंस मामले को लेकर के चर्चा में रहते हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उनको बची हुई रकम को जमा करने को लेकर के कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि उनकी जगह जेल में है. बता दें कि ये मामला करीब 16 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत 2010 में राजपाल यादव की फिल्म अता पता लापता से जुड़ी हुई थी. आज राजपाल यादव की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी. जिसमें उनको पैसे वापस करने के लिए कुछ समय की मोहलत दी गई है. आइए जानते हैं कि राजपाल यादव और जज के बीच क्या बातचीत हुई. 

सुप्रीम कोर्ट और राजपाल यादव के बीच दिलचस्प बातचीत 

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने राजपाल यादव से पूछा कि कोई सीरियल फिल्म बना रहे हो या नहीं. इस पर राजपाल यादव ने जवाब दिया कि 16 साल में 250 फिल्में कर चुका हूं. इस फिल्म में 5 करोड़ लगाकर 250 करोड़ रुपए डुबा चुका हूं. सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को 1करोड 15 लाख रुपए जमा करने को कहा है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार तक बाकी 85 लाख रुपए RTGS के जरिए जमा करने को कहा. बातचीत में माहौल को हल्का करने की भी कोशिश की गई. जज सूर्यकांत ने राजपाल यादव से कहा कि, कोई अच्छी सी फिल्म बनाइए हमारे यहां भी कई एडवोकेट अच्छे एक्टर हैं.

इस पर राजपाल यादव ने जवाब दिया, अता पता लापता में नुकसान हो चुका है. इस चक्कर में मेरे 17 करोड़ रुपये डूब चुके हैं. आप जहां जब चाहें, जहां भेज दें, मैं तैयार हूं. लेकिन कुल 22 करोड़ रुपये थे. इससे एक रुपया भी नहीं कमाया गया. फिल्म एक थिएटर में भी रिलीज नहीं हो पाई.

क्या था पूरा मामला

ये मामला साल 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपए की मदद ली थी. फिल्म बनी और साल 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कुछ खासा कमाल नहीं कर पाई. पैसे वापस करने को लेकर मामला बढ़ा और राजपाल यादव द्वारा दिए गए 7 चेक बाउंस होने के बाद साल 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी हुआ था, जिसमें ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने की बात थी. लेकिन मामला बढ़ा और अदालत पहुंचा. साल 2018 में ट्रायल कोर्ट में राजपाल यादव को दोषी माना गया. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में उनकी तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी. फरवरी 2026 में वो तिहाड़ जेल भी गए थे और बाद में 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें राहत मिली.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?

सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आखिरी मौका देते हुए 2 करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री जमा करने को कहा था. सुनवाई के दौरान अदालत ने ये भी कमेंट किया था कि आप एक्टर हैं लेकिन उम्मीद है कि अदालत में भी एक्टिंग नहीं कर रहे होंगे. लेकिन तय समय में पैसे ना जमा करने के चलते और अदालत के आदेशों का पालन ना करने की वजह से वो आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. 

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