विज्ञापन

500 डॉलर में बिक रहा साइबर अटैक करने वाला टूल, ऐसे में कैसे रखें खुद को सुरक्षित? माइक्रोसॉफ्ट निदेशक से समझिए

एआई के दौर में साइबर अटैक का खतरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में ये आम लोगों के लिए भी सबसे बड़ा खतरा बन गया है. माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक निकोलस बट्स ने एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में जो बातें बताई वो आम लोगों के चिंतित और सतर्क होने का विषय है.

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक निकोलस बट्स . (फोटो-एनडीटीवी)
  • माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक निकोलस बट्स ने बताया कि बाजार में पांच सौ डॉलर में साइबर अटैक टूल खुलकर बिक रहा है
  • भारत सातवें स्थान पर है जहां सबसे ज्यादा साइबर हमलों का सामना करना पड़ता है और एशिया में तीसरा है
  • साइबर हमलावर पुराने कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी, टेलीकॉम और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं

माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक निकोलस बट्स ने एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में एक खतरनाक बात बताई. उन्होंने कहा कि बाजारों में खुलेआम 500 डॉलर में साइबर अटैक करने वाला टूल बिक रहा है. ऐसे समय जब अमीर हो या गरीब, पढ़े-लिखे हो या अनपढ़ हर हाथ में इंटरनेट वाला मोबाइल फोन आ गया है तो ये इस खतरे को कोई हल्के में नहीं ले सकता. भारत में तो डिजिटल ट्रांजेक्शन सब्जी बेचने वाले से लेकर ऑटो वाले तक कर रहे हैं. ऐसे में साइबर अटैक का खतरा देशों की सुरक्षा से अब आम जनता तक पहुंच गया है.

निकोलस बट्स माइक्रोसॉफ्ट में AI और साइबर सुरक्षा नीति के निदेशक हैं.एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में निकोलस बट्स ने साइबर अटैक को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की.

भारत पर सबसे ज्यादा खतरा

  • माइक्रोसॉफ्ट हर दिन लगभग 165 ट्रिलियन टेलीमेट्री सिग्नल्स को प्रोसेस करता है.
  • हम रोज़ाना लगभग 5 बिलियन ईमेल की जांच करते हैं और हर दिन लगभग 5 मिलियन नए मैलवेयर फाइल्स को ब्लॉक करते हैं.
  • हम देख रहे हैं कि हमलावर AI का इस्तेमाल करके अपने हमलों की गति और दायरा बढ़ा रहे हैं.
  • हम देखते हैं कि वे इसका इस्तेमाल सूचना और प्रभाव डालने वाले अभियानों के लिए करते हैं.
  • वे डीपफेक का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के साथ-साथ अन्य तरह के उद्देश्यों के लिए भी करते हैं.
  • दुनिया भर में सबसे ज्यादा साइबर हमलों का सामना करने वाले देशों की सूची में भारत सातवें नंबर पर है.
  • साइबर हमले के मामले में एशिया में भारत तीसरा सबसे ज्यादा निशाना बनने वाला देश है.

कैसे और क्यों कर रहे अटैक

  • माइक्रोसॉफ्ट में हम जितने भी साइबर हमलों का पता लगाते हैं, उनमें से लगभग 60% हमले एक ऐसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं, जो 2020 में सामने आई थी.
  • मतलब, यह कमजोरी पिछले छह सालों से मौजूद है.
  • वे अभी भी उन्हीं पुरानी कमजोरियों का इस्तेमाल कर रहे हैं. 
  • वे अभी भी उन्हीं चीजों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें वे हमेशा से निशाना बनाते आए हैं - जैसे सरकारी संस्थान, टेलीकॉम और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), और शोध संस्थान.
  • वे अभी भी उन्हीं चीजों के पीछे हैं: डेटा, एक्सेस (सूचनाओं तक पहुंच), पैसा और भू-राजनीतिक उद्देश्य.
  • चीन से जुड़े कुछ ऐसे पक्ष हैं जो एक जैसे भू-राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.
  • रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से भी ऐसे ही पक्ष हैं, जिन पर हम नजर रख रहे हैं. 
  • पहला उदाहरण एक ऐसा पक्ष है जिसे हम 'स्टॉर्म 3168' के नाम से ट्रैक करते हैं, जिसे कभी-कभी 'जेड पफर' भी कहा जाता है.
  • यह चीन में स्थित एक रैनसमवेयर संगठन है, जो दुनिया भर में ग्राहकों के खिलाफ रैनसमवेयर हमले करने के लिए AI एजेंटों का इस्तेमाल कर रहा है.
  • दूसरा उदाहरण यह है कि रूस और चीन, दोनों ही देशों द्वारा समर्थित पक्ष अपनी जासूसी गतिविधियों में ऐसे एजेंटों का उपयोग कर रहे हैं.
  • हाल ही में, माइक्रोसॉफ्ट ने एक नए 'थ्रेट इंटेलिजेंस' रिपोर्ट जारी की, जिसे हम 'स्टॉर्म 0940' के रूप में ट्रैक करते हैं.
  • चीन समर्थित यह पक्ष मुख्य रूप से डेटा चोरी और जासूसी के लिए काम करता है.
  • यह नए संगठनों में घुसपैठ करने के लिए 'ओपन सोर्स एजेंटिक टूल' का इस्तेमाल कर रहा है.
  • कम क्षमता वाले साइबर अपराधी AI की मदद से कहीं अधिक सक्षम और बड़े पैमाने पर काम करने वाले बन गए हैं.
  • फरवरी में, हमने 'ईविल टोकन्स' नामक एक नए खतरे को ट्रैक करना शुरू किया.
  • असल में, दो व्यक्तियों ने ओपन-सोर्स और क्लोज़्ड-सोर्स मॉडल का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया था.
  • यह पूरी तरह से एक 'ऑटोनॉमस' (स्वचालित) आपराधिक ढांचा है, जो 1,500 डॉलर की शुरुआती कीमत पर एक्सेस बेचता है.
  • इसके बाद हर महीने 500 डॉलर का सब्सक्रिप्शन लेता है. 
  • इसमें आपको कई ऐसे टूल मिलते हैं, जिनका इस्तेमाल आप आक्रामक साइबर गतिविधियों के लिए कर सकते हैं.
  • इन दो व्यक्तियों ने सिर्फ छह महीने में इसे तैयार कर लिया. इसने 120 देशों के 10,000 से ज्यादा संगठनों को प्रभावित किया है.

इन सभी बातों को बताने के बाद जब निकोलस से पूछा गया कि आखिर इससे बच कैसे सकते हैं तो उनका जवाब था वैसे ही जैसे बारिश के दिनों में टपकते छत के हर छेद को बंद करके किया जाता है. निकोलस बट्स ने साफ-साफ बता दिया कि साइबर अटैक करने वाले अभी भी 6 तरीकों से अटैक कर रहे हैं और हमें उस 6 छेदों को बंद करना है. उन्होंने भारत के साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की इच्छा भी जताई. मगर, आम लोगों को  ऐसे में कम से कम साइबर अटैक या किसी तरह के स्कैम से बचने के लिए इतना तो करना ही चाहिए...

  • किसी भी लालच दिलाने वाली, चौंकाने वाली या संदिग्ध फाइल को मत खोलें.
  • अपने मोबाइल-लैपटॉप के पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें.
  • साथ ही बैंकिंग एप और ईमेल आदि के पासवर्ड भी चेंज करते रहें.
  • किसी को भी अपने मोबाइल या लैपटॉप से डेटा ट्रांसफर करने के लिए देते समय सतर्क रहें.
  • किसी भी ऐप को हर समय आपको ट्रैक करने का ऑप्शन मत दें.
  • अगर आप सोशल मीडिया पर या किसी भी साइट पर लगातार कोई चीज सर्च कर रहे हैं तो आपका डेटा संबंधित लोगों तक भेजा जा सकता है.
  • ऐसे में कई स्कैमर आपसे तरह-तरह से संपर्क कर सकते हैं.
  • उनको पता होगा कि आप क्यों ढूंढ रहे हैं और कितना पैसा आप खर्च करने की सोच रहे हैं.
  • तो अगर आप कुछ खरीदने की सोच रहे हैं तो सावधानी से मोल-भाव करें.
  • पैसा देने से पहले अपने सामान की गुणवत्ता या उसकी सत्यता के बारे में पता कर लें.
  • अगर आप किसी सरकारी या प्राइवेट नौकरी या धंधे में हैं तो आपको अपने काम के बारे में ज्यादा जानकारी अनजान लोगों को नहीं देनी चाहिए.
  • सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
  • आपकी तस्वीरों से भी स्कैम करने वालों को आपके बारे में पता चलता है.
  • साथ ही आपकी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल हो सकता है.

यह भी पढ़ें-

प्रवासियों के बारे में क्या सोचते हैं UK के लोग, भारतीय होने की वजह से क्या झेला; मेयर तुषार कुमार ने बताया

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Cyber Attack, Cyber Attack By AI, India Cyber Attack, Microsoft, Nicholas Butts
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com