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मंदिर में चढ़े फूल कचरे में नहीं जाएंगे, रोज़ 50,000 अगरबत्तियां बना कमाई करेंगी महिलाएं

मंदिरों में चढ़ाए जानेवाली फूल-मालाएं कचरे में ना जाएं इसके लिए डूंगरपुर में एक अनूठी पहल शुरू की गई है.

मंदिर में चढ़े फूल कचरे में नहीं जाएंगे, रोज़ 50,000 अगरबत्तियां बना कमाई करेंगी महिलाएं
मंदिरों के फूलों को फेंकने की जगह उनसे अगरबत्ती बनाई जाएगी
NDTV/Unsplash

मंदिरों में देवी-देवताओं की पूजा के लिए भक्त फूल-माला चढ़ाते हैं. लेकिन चढ़ावे के फूलों का निस्तारण एक बड़ी चुनौती रहा करती है. राजस्थान के डूंगरपुर शहर में इसी समस्या के समाधान की दिशा में एक अभिनव प्रयास किया गया है. डूंगरपुर नगर परिषद की ओर से शहर में अगरबत्ती निर्माण का एक यूनिट शुरू किया गया है. इसमें मंदिरों में चढ़ाई गई फूल-मालाओं से अगरबत्ती बनाई जाएगी. इससे एक ओर फूलों की व्यवस्था का रास्ता निकलेगा. साथ ही महिलाओं को इससे रोजगार का भी अवसर मिलेगा और उन्हें आजीविका चलाने में मदद मिलेगी. इसे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा देनेवाला पहल बताया जा रहा है. 

सामुदायिक केंद्र में लगाई गई मशीन

सामुदायिक केंद्र में लगाई गई मशीन
Photo Credit: NDTV

कैसे बनाई जाएगी अगरबत्ती

डूंगरपुर के शास्त्री कॉलोनी स्थित सामुदायिक भवन में अगरबत्ती निर्माण यूनिट की शुरुआत की गई है. इस यूनिट में मंदिरों में प्रतिदिन चढ़ने वाले फूलों का सदुपयोग कर उन्हें सुगंधित अगरबत्तियों में परिवर्तित किया जाएगा. 

इस यूनिट में शहर के विभिन्न मंदिरों से प्रतिदिन एकत्र किए जाने वाले पुष्पों को पहले वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जाएगा. इसके बाद उनसे सुगंधित पेस्ट तैयार कर आधुनिक मशीनों की सहायता से अगरबत्तियों का निर्माण किया जाएगा.

मशीन को बहुत आसानी से चलाया जा सकता है

मशीन को बहुत आसानी से चलाया जा सकता है
Photo Credit: NDTV

प्रतिदिन 50 हजार अगरबत्तियां

इस अभिनव पहल का उद्घाटन स्वच्छता के प्रदेश ब्रांड एंबेसेडर केके गुप्ता ने किया. उन्होंने कहा कि इस यूनिट से जहां धार्मिक आस्था से जुड़े फूलों का सम्मानजनक पुन: उपयोग होगा, वहीं शहर को स्वच्छ रखने के साथ महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे.

उन्होंने कहा,"मंदिरों में चढ़ने वाले फूल अक्सर कचरे के रूप में फेंक दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी उत्पन्न होती है. अब इन्हीं फूलों को उपयोगी उत्पाद में बदलकर न केवल कचरे का प्रभावी प्रबंधन किया जाएगा, बल्कि स्वच्छता अभियान को भी मजबूती मिलेगी."

केके गुप्ता ने बताया कि यूनिट में स्थापित मशीन की क्षमता प्रति घंटे करीब 1000 अगरबत्तियां तैयार करने की है. प्रतिदिन 50 हजार से अधिक अगरबत्तियों का उत्पादन किया जा सकेगा. तैयार उत्पाद को स्थानीय बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे महिलाओं की आय में वृद्धि होगी.

 स्वच्छता के प्रदेश ब्रांड एंबेसेडर केके गुप्ता के साथ यूनिट में काम करनेवाली महिलाएं

स्वच्छता के प्रदेश ब्रांड एंबेसेडर केके गुप्ता के साथ यूनिट में काम करनेवाली महिलाएं
Photo Credit: NDTV

महिलाओं के लिए रोजगार

इस पूरी प्रक्रिया का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा, जिससे स्थानीय महिलाओं को नियमित रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा. नगर परिषद की इस पहल को शहर में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है. स्थानीय लोगों ने भी इस नवाचार का स्वागत करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के हित में एक सराहनीय कदम बताया.

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