नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना:
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास दो बंगले हैं। इस पर बीजेपी और खासकर विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी को आपत्ति है। रविवार को इस मुद्दे पर नीतीश कुमार ने सफाई दी।
मुख्यमंत्री के लिए दो बंगले आवंटित करने का नियम
नीतीश ने कहा कि बिहार में अन्य राज्यों की तरह पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए उनके जीवनपर्यंत एक मकान का प्रबंध है। जब उन्होंने 2014 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तब उन्हें भी एक बंगला मिला और आज भी वे वहीं रहते हैं। बिहार में नया नियम बीजेपी के सरकार में सहयोगी रहने के दौरान ही बना था। अब बिहार में कोई भी मुख्यमंत्री बनेगा तो उसे एक और बंगला इसलिए भी आवंटित कर दिया जाएगा कि अगर वह भूतपूर्व हो जाए तो मुख्यमंत्री आवास 1 ऐनी मार्ग में महीनों न रहे बल्कि उसे कुछ घंटे में नए मुख्यमंत्री के लिए खाली कर दिया जाए।
जिन लोगों के पास पटना में निजी घर है वे सरकारी बंगला न लें
नीतीश ने कहा कि इस बेकार के विवाद में वे नहीं पड़ना चाहते। अगर गलत है तो भारतीय जनता पार्टी को इसे हटवा देना चाहिए। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता खासकर सुशील मोदी को उन्होंने सलाह दी कि आरोप लगाने के पहले वे अन्य राज्यों में इस मुद्दे पर क्या नियम है, मालूम कर लें। सुशील मोदी के पास निजी घर हैं, इसके बाबजूद उन्होंने सरकारी बंगला लिया हुआ है। और नीतीश ने लगे हाथों कह दिया कि जिन लोगों के पास पटना में निजी घर हो उन्हें सरकारी बंगला नहीं लेना चाहिए। यह बात अलग है कि नीतीश की इस बात का समर्थन खुद उनके सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव नहीं कारेंगे, जिनके पास सरकारी बंगला भी है और पटना में एक से ज्यादा निजी घर भी।
हालांकि नीतीश ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला आवंटित होने के बाद वोटर लिस्ट में उन्होंने अपना नाम अब पटना में दर्ज करा लिया है। अब तक वे अपने पैत्रिक शहर बख्तिरपुर में वोटर के रूप में हर चुनाव में वोट देने जाते थे।
इस बीच दो पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगनाथ मिश्र और जीतनराम मांझी ने वर्तमान में आवंटित घर से बड़े घर की मांग करते हुए अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। इन दोनों नेताओं का कहना है कि उन्हें राजनीतिक बदले की भावना से ग्रसित होकर काफी छोटा घर दिया गया है।
मुख्यमंत्री के लिए दो बंगले आवंटित करने का नियम
नीतीश ने कहा कि बिहार में अन्य राज्यों की तरह पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए उनके जीवनपर्यंत एक मकान का प्रबंध है। जब उन्होंने 2014 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया तब उन्हें भी एक बंगला मिला और आज भी वे वहीं रहते हैं। बिहार में नया नियम बीजेपी के सरकार में सहयोगी रहने के दौरान ही बना था। अब बिहार में कोई भी मुख्यमंत्री बनेगा तो उसे एक और बंगला इसलिए भी आवंटित कर दिया जाएगा कि अगर वह भूतपूर्व हो जाए तो मुख्यमंत्री आवास 1 ऐनी मार्ग में महीनों न रहे बल्कि उसे कुछ घंटे में नए मुख्यमंत्री के लिए खाली कर दिया जाए।
जिन लोगों के पास पटना में निजी घर है वे सरकारी बंगला न लें
नीतीश ने कहा कि इस बेकार के विवाद में वे नहीं पड़ना चाहते। अगर गलत है तो भारतीय जनता पार्टी को इसे हटवा देना चाहिए। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता खासकर सुशील मोदी को उन्होंने सलाह दी कि आरोप लगाने के पहले वे अन्य राज्यों में इस मुद्दे पर क्या नियम है, मालूम कर लें। सुशील मोदी के पास निजी घर हैं, इसके बाबजूद उन्होंने सरकारी बंगला लिया हुआ है। और नीतीश ने लगे हाथों कह दिया कि जिन लोगों के पास पटना में निजी घर हो उन्हें सरकारी बंगला नहीं लेना चाहिए। यह बात अलग है कि नीतीश की इस बात का समर्थन खुद उनके सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव नहीं कारेंगे, जिनके पास सरकारी बंगला भी है और पटना में एक से ज्यादा निजी घर भी।
हालांकि नीतीश ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला आवंटित होने के बाद वोटर लिस्ट में उन्होंने अपना नाम अब पटना में दर्ज करा लिया है। अब तक वे अपने पैत्रिक शहर बख्तिरपुर में वोटर के रूप में हर चुनाव में वोट देने जाते थे।
इस बीच दो पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगनाथ मिश्र और जीतनराम मांझी ने वर्तमान में आवंटित घर से बड़े घर की मांग करते हुए अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। इन दोनों नेताओं का कहना है कि उन्हें राजनीतिक बदले की भावना से ग्रसित होकर काफी छोटा घर दिया गया है।
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