मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस (फाइल फोटो)
मुंबई:
अभिनेत्री और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी की डांस अकादमी के लिए जमीन देने का मामला महाराष्ट्र सरकार में नया बवाल पैदा कर गया है। इस बवाल में राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे आमने-सामने आ चुके हैं।
1983 का फैसला रद्द किया, नई पॉलिसी बनेगी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राजस्व विभाग में सीधे हस्तक्षेप किया है। विभाग के प्रधान सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि सस्ते दामों पर जमीन आवंटित करने का 1983 का तत्कालीन कैबिनेट का फैसला रद्द किया जाए और इस बाबत नई पॉलिसी बनाई जाए। उनके आदेश का खुलासा होने पर मुख्यमंत्री ने इसको लेकर मुम्बई में संवाददाताओं के समक्ष हामी भरी है।
दो हजार वर्गमीटर जमीन सिर्फ 70 हजार रुपये में दी
ज्ञात हो कि, 1983 के तत्कालीन कैबिनेट के आदेश का सहारा लेकर राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने मुम्बई के आम्बिवली इलाके में 2 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन 1976 के दाम लगाते हुए महज 70 हजार रुपए में हेमा मालिनी के ट्रस्ट को दी है। फैसले का विरोध करने वालों ने मांग की थी कि जिस साल में जमीन आवंटित हो रही हो उस समय के रेडिरेकनर अर्थात सरकारी दर पर जमीन की कीमत वसूली जाए ताकि सरकार को घाटा न उठाना पड़े।
इस फैसले पर मचे बवाल को देखते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने खुद मामले में दखल दिया और अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए नए आदेश दिए हैं। महाराष्ट्र में इस निर्णय के अधीन रहकर अब तक कई संस्थाओं को 1976 के दामों पर कई एकड़ जमीन का बंटवारा किया गया है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से एकनाथ खड़से बौखलाए
दूसरी तरफ अपने विभाग में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से बौखला उठे हैं। अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए उन्होंने मुम्बई में संवाददाताओं को बताया कि, उन्हें तो पता ही नहीं था कि ऐसा कुछ हुआ है। मंत्री जी शुरुआत में बहुत देर तक ऐसे किसी भी फैसले को नकारते रहे थे।
सरकारी जमीन कौड़ियों के मोल देने का सिलसिला बंद होगा
सूत्र बताते हैं कि, जमीन आवंटन का अधिकार भले ही राजस्व मंत्री का हो, खासकर मुम्बई महानगर क्षेत्र में जमीन के आवंटन का फैसला मुख्यमंत्री की हरी झंडी के बगैर नहीं हो सकता। हालांकि, हेमा मालिनी की डांस अकादमी को जमीन देने के मामले में ऐसा हुआ नहीं। उस फैसले का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को संज्ञान में नहीं लिया गया। इसका हिसाब उन्होंने पॉलिसी रद्द करने के आदेश देकर पूरा किया है। हालांकि नेताओं के इस संघर्ष का असर हेमा मालिनी को मिली जमीन के प्लाट पर नहीं होने वाला। जबकि, आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में सरकारी जमीन कौड़ियों के दाम लूटने का काम बंद हो सकता है।
1983 का फैसला रद्द किया, नई पॉलिसी बनेगी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राजस्व विभाग में सीधे हस्तक्षेप किया है। विभाग के प्रधान सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि सस्ते दामों पर जमीन आवंटित करने का 1983 का तत्कालीन कैबिनेट का फैसला रद्द किया जाए और इस बाबत नई पॉलिसी बनाई जाए। उनके आदेश का खुलासा होने पर मुख्यमंत्री ने इसको लेकर मुम्बई में संवाददाताओं के समक्ष हामी भरी है।
दो हजार वर्गमीटर जमीन सिर्फ 70 हजार रुपये में दी
ज्ञात हो कि, 1983 के तत्कालीन कैबिनेट के आदेश का सहारा लेकर राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने मुम्बई के आम्बिवली इलाके में 2 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन 1976 के दाम लगाते हुए महज 70 हजार रुपए में हेमा मालिनी के ट्रस्ट को दी है। फैसले का विरोध करने वालों ने मांग की थी कि जिस साल में जमीन आवंटित हो रही हो उस समय के रेडिरेकनर अर्थात सरकारी दर पर जमीन की कीमत वसूली जाए ताकि सरकार को घाटा न उठाना पड़े।
इस फैसले पर मचे बवाल को देखते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने खुद मामले में दखल दिया और अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए नए आदेश दिए हैं। महाराष्ट्र में इस निर्णय के अधीन रहकर अब तक कई संस्थाओं को 1976 के दामों पर कई एकड़ जमीन का बंटवारा किया गया है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से एकनाथ खड़से बौखलाए
दूसरी तरफ अपने विभाग में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से बौखला उठे हैं। अपनी नाराजगी का इजहार करते हुए उन्होंने मुम्बई में संवाददाताओं को बताया कि, उन्हें तो पता ही नहीं था कि ऐसा कुछ हुआ है। मंत्री जी शुरुआत में बहुत देर तक ऐसे किसी भी फैसले को नकारते रहे थे।
सरकारी जमीन कौड़ियों के मोल देने का सिलसिला बंद होगा
सूत्र बताते हैं कि, जमीन आवंटन का अधिकार भले ही राजस्व मंत्री का हो, खासकर मुम्बई महानगर क्षेत्र में जमीन के आवंटन का फैसला मुख्यमंत्री की हरी झंडी के बगैर नहीं हो सकता। हालांकि, हेमा मालिनी की डांस अकादमी को जमीन देने के मामले में ऐसा हुआ नहीं। उस फैसले का ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को संज्ञान में नहीं लिया गया। इसका हिसाब उन्होंने पॉलिसी रद्द करने के आदेश देकर पूरा किया है। हालांकि नेताओं के इस संघर्ष का असर हेमा मालिनी को मिली जमीन के प्लाट पर नहीं होने वाला। जबकि, आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में सरकारी जमीन कौड़ियों के दाम लूटने का काम बंद हो सकता है।
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