मुंबई और कोंकण के इलाके में मानसून इस हफ्ते पहुंचने का अनुमान है. मौसम विभाग ने बताया है कि अरब सागर में निम्न दबाव वाला क्षेत्र बना हुआ है और भारत के पश्चिमी तट से 300 किलोमीटर की दूरी पर साइक्लोन की स्थिति बन रही है. हालांकि साइक्लोन महाराष्ट्र के तट से नहीं टकराएगा लेकिन इसकी वजह से तेज हवाएं और समुद्री विक्षोभ पैदा हो सकता है. वैसे मानसून हर सामान्य रूप से 7 जून तक मुंबई पहुंच जाता है लेकिन अब पूरे राज्य में मानसून का असर दिखने में 15 दिन और लगेगा. फिलहाल बन रहे हालात को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मछुआरों को समुद्र तट पर जाने से रोक दिया है.
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मौसम विभाग ने बताया कि अगले दो दिनों और उसके बाद यह निम्न दबाव वाला क्षेत्र और गहरा जाएगा और चक्रवात में बदल जाएगा. विभाग ने दूर-दराज क्षेत्रों और लक्षद्वीप समूह में भारी बारिश और तटीय क्षेत्र में तूफान वाले मौसम की आशंका जताई है. विभाग ने मछुआरों को 13 जून तक मछली पकड़ने के लिए समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है. विभाग ने शाम तीन बजे इस संबंध में बुलेटिन जारी करके बताया कि चक्रवात के प्रभाव की वजह से दक्षिणपूर्वी अरब सागर, लक्षद्वीप क्षेत्र और पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर निम्न दबाव वाला क्षेत्र बन गया है. मौसम रिपोर्ट में उत्तर मलप्पुरम और कोझिकोड में 12 जून को भारी से भारी बारिश की आशंका जताई है.
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गौरतलब है कि लगभग एक सप्ताह की अनुमानित देरी के बाद दक्षिण पश्चिमी मानसून ने केरल तट पर शनिवार को दस्तक दे दी है. दक्षिण पश्चिम मानसून ही उत्तर और मध्य भारत सहित देश के अधिकांश इलाकों में लगभग चार महीने तक चलने वाली बारिश की ऋतु का वाहक माना जाता है. जिला कलेक्टर ने उन क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट रहने को कहा है जहां पिछले साल मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं हुई थी.
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