प्रतीकात्मक फोटो
मुंबई:
महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के विधायक ने अपनी ही सरकार को सूखा राहत को लेकर काफी खरीखोटी सुनाई है। शिवसेना के विधायक हेमंत पाटील ने अपने भाषण में यहां तक कह दिया कि वे खुद को सत्तापक्ष का विधायक कहलवाने पर शर्मिंदा महसूस करते हैं। पाटील का आक्षेप है कि सत्तापक्ष की सूखा राहत की कोशिश नाकाफी है।
पार्टी कार्यकर्ता किसान की खुदकुशी पर बिफरे
पाटील का गुस्सा फूट पड़ने को वजह बनी उन्हीं के कार्यकर्ता और किसान की आत्महत्या। पाटील के चुनाव क्षेत्र दक्षिण नांदेड़ से मुम्बई पहुंचे महेश कदम ने राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय 'मंत्रालय' के बाहर गत बुधवार को जहर खा लिया। बताया गया कि कदम सूखे से बदहाल खेती के कारण परेशान था। शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
विधानमंडल के दोनों सदनों में बहस
महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में सोमवार को इस बात पर खूब गरमागरम बहस हुई। इस मसले पर खुली बहस के लिए विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने नकार दिया। इसके चलते सदन में भारी हंगामा हुआ और सदन की कार्रवाई कई बार रोकनी पड़ी।
सरकार ने दी सफाई
इस बीच सरकार ने महेश कदम के निधन को दुखद बताया। वरिष्ठ बीजेपी नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने सदन में कहा कि महेश कदम को उसके खेती के नुकसान के मुआवजे के ऐवज में 4600 रुपये दिए जा चुके थे। साथ ही 10 दिन पहले ही जरूरी अनाज भी परिवार को दिया जा चुका था। इसके अलावा कपास की खेती के नुकसान का मुआवजा भी देने की तैयारी की गई थी।
चुनाव क्षेत्र में क्या मुंह लेकर जाएं?
सत्ता पक्ष के इस बयान से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। सदन में जारी हंगामे के बीच शिवसेना विधायक हेमंत पाटील खड़े हुए। उन्होंने सूखे से निबटने के लिए जारी सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कहा कि, अब वे अपने चुनाव क्षेत्र में क्या मुंह लेकर जाएंगे? चार हजार रुपए से क्या होगा? इसी गुस्से को जाहिर करते हुए पाटील बोल गए कि उन्हें सत्तापक्ष का विधायक कहलवाने में शर्म आती है।
पार्टी कार्यकर्ता किसान की खुदकुशी पर बिफरे
पाटील का गुस्सा फूट पड़ने को वजह बनी उन्हीं के कार्यकर्ता और किसान की आत्महत्या। पाटील के चुनाव क्षेत्र दक्षिण नांदेड़ से मुम्बई पहुंचे महेश कदम ने राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय 'मंत्रालय' के बाहर गत बुधवार को जहर खा लिया। बताया गया कि कदम सूखे से बदहाल खेती के कारण परेशान था। शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
विधानमंडल के दोनों सदनों में बहस
महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में सोमवार को इस बात पर खूब गरमागरम बहस हुई। इस मसले पर खुली बहस के लिए विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने नकार दिया। इसके चलते सदन में भारी हंगामा हुआ और सदन की कार्रवाई कई बार रोकनी पड़ी।
सरकार ने दी सफाई
इस बीच सरकार ने महेश कदम के निधन को दुखद बताया। वरिष्ठ बीजेपी नेता और राजस्व मंत्री एकनाथ खड़से ने सदन में कहा कि महेश कदम को उसके खेती के नुकसान के मुआवजे के ऐवज में 4600 रुपये दिए जा चुके थे। साथ ही 10 दिन पहले ही जरूरी अनाज भी परिवार को दिया जा चुका था। इसके अलावा कपास की खेती के नुकसान का मुआवजा भी देने की तैयारी की गई थी।
चुनाव क्षेत्र में क्या मुंह लेकर जाएं?
सत्ता पक्ष के इस बयान से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। सदन में जारी हंगामे के बीच शिवसेना विधायक हेमंत पाटील खड़े हुए। उन्होंने सूखे से निबटने के लिए जारी सरकारी प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कहा कि, अब वे अपने चुनाव क्षेत्र में क्या मुंह लेकर जाएंगे? चार हजार रुपए से क्या होगा? इसी गुस्से को जाहिर करते हुए पाटील बोल गए कि उन्हें सत्तापक्ष का विधायक कहलवाने में शर्म आती है।
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