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किसानों का मुंबई कूच: 12 हजार किसान-आदिवासी सड़कों पर, कर्जमाफी और जमीन के हक को लेकर आर-पार की लड़ाई

महाराष्ट्र में 12 हजार से अधिक किसान और आदिवासी कर्जमाफी, सूखा राहत, जमीन के अधिकार और लाडकी बहीण योजना के मुद्दों को लेकर मुंबई की ओर मार्च कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन किसान लिखित आश्वासन पर अड़े हैं.

किसानों का मुंबई कूच: 12 हजार किसान-आदिवासी सड़कों पर, कर्जमाफी और जमीन के हक को लेकर आर-पार की लड़ाई
मुंबई की ओर बढ़े 12 हजार किसान, CM आवास तक पहुंचने की तैयारी
NDTV
  • कर्जमाफी और जमीन के हक के लिए 12 हजार किसानों का मुंबई कूच
  • लाडकी बहीण योजना और सूखा राहत भी आंदोलन के केंद्र में
  • मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए बुलाया, फिर भी आंदोलन पर अड़े किसान
नासिक / मुंबई:

महाराष्ट्र में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के नेतृत्व में 12 हजार से अधिक किसान और आदिवासी 1000 से ज्यादा वाहनों के साथ नासिक और अकोले से मुंबई की ओर कूच कर रहे हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि कर्जमाफी, सूखा राहत, जमीन के अधिकार और विभिन्न योजनाओं के लंबित भुगतान जैसे मुद्दों पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और लिखित निर्णय चाहिए. इसी उद्देश्य से किसान मुंबई पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने की तैयारी में हैं. NDTV के लिए राहुल वाघ की रिपोर्ट.

मुंबई की ओर बढ़ रहा किसानों का लंबा मार्च

NDTV को प्राप्त जानकारी के मुताबिक किसानों और आदिवासियों का यह लॉन्ग मार्च महाराष्ट्र सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने के लिए निकाला जा रहा है. आंदोलन में 12 हजार से अधिक लोग शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि 1000 से ज्यादा वाहन भी इस काफिले का हिस्सा हैं. अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन का लक्ष्य मुंबई पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा' तक अपनी आवाज पहुंचाना है.

मुंबई की ओर बढ़ते किसान और महिलाएं

मुंबई की ओर बढ़ते किसान और महिलाएं
Photo Credit: NDTV

कर्जमाफी प्रमुख मुद्दा

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी का लाभ दिया जाए. किसानों का कहना है कि मौजूदा राहत और योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं. सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें अधिक प्रभावी सहायता की आवश्यकता है.

सूखा राहत और नमो शेतकरी योजना पर भी मांग

किसान संगठनों का आरोप है कि राज्य के 305 सूखाग्रस्त तालुकों में दी जा रही 5000 रुपये की सहायता अपर्याप्त है. वे उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही नमो शेतकरी योजना की दो लंबित किस्तों को तुरंत जारी करने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा है.

जमीन के मालिकाना हक की मांग

मोर्चे में शामिल किसान वन भूमि, चरागाह और देवस्थान की जमीन पर लंबे समय से खेती कर रहे किसानों को मालिकाना हक देने की मांग भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों से खेती करने के बावजूद उन्हें भूमि अधिकार नहीं मिल पाए हैं, जिससे वे कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं.

लाड़की बहिण योजना का मुद्दा भी शामिल

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि ई-केवाईसी के कारण लाड़की बहिण योजना से बाहर हुई 81 लाख महिलाओं को दोबारा योजना में शामिल किया जाए. साथ ही उनका बकाया मानदेय भी जल्द जारी किया जाए ताकि लाभार्थियों को आर्थिक सहायता मिल सके.

आशा, आंगनवाड़ी और मजदूर भी मार्च में शामिल

यह आंदोलन केवल किसानों तक सीमित नहीं है. सीआईटीयू और जनवादी महिला संगठन के बैनर तले आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कर्मचारी और निर्माण मजदूर भी मार्च में शामिल हुए हैं. घाटणदेवी, इगतपुरी में पड़ाव के बाद यह काफिला कसारा घाट से होते हुए मुंबई की ओर बढ़ रहा है.

मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए बुलाया

मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को शाम 4 बजे सह्याद्री गेस्ट हाउस में चर्चा के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि वे केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे और अपनी मांगों पर लिखित निर्णय चाहते हैं.

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