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This Article is From Apr 13, 2026

कांकेर मुठभेड़ में ‘रूपी’ ढेर: बस्तर की आखिरी तेलुगू महिला माओवादी कमांडर का अंत, पति भी एनकाउंटर में मारा गया था

Naxalite Rupi Encounter: ACM रूपी मोहला मानपुर इलाके मुठभेड़ में मारे गए नक्सली विजय रेड्डी की पत्नी थी, जो लंबे समय से माओवाद संगठन की कमान संभाल कर नक्सल गतिविधियों को अंजाम दे रही थी. इस पर तकरीबन 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था.

कांकेर मुठभेड़ में ‘रूपी’ ढेर: बस्तर की आखिरी तेलुगू महिला माओवादी कमांडर का अंत, पति भी एनकाउंटर में मारा गया था

Kanker Encounter: बस्तर के जंगलों में एक और बड़ी मुठभेड़… और एक बड़ा नाम खत्म. कांकेर जिले के माचपल्ली इलाके में सुरक्षा बलों ने महिला माओवादी कमांडर ‘रूपी' को मार गिराया है. यह वही रूपी है, जो डीकेएसजेडसी के कुख्यात नक्सली नेता विजय रेड्डी की पत्नी थी जिसे पिछले साल 2025 में मानपुर-मोहला में मुठभेड़ में ढेर किया गया था.

सुरक्षाबलों ने 'रूपी' को मार गिराया

सूत्रों के मुताबिक, छोटेबेठिया-परतापुर थाना सीमा के माचपल्ली-आरामझोरा-हिडूर के घने जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी. इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. जंगल के भीतर घुसते ही अचानक गोलियां चलने लगीं... जिसके बाद दोनों ओर से तेज फायरिंग हुई. मुठभेड़ थमने के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ.

पिस्टल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद

शव की पहचान नक्सली रूपीके रूप में हुई. वो एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) रैंक की कमांडर है और बस्तर में सक्रिय आखिरी तेलुगू मूल की महिला नक्सली थी. बता दें कि रूपी सुरक्षा एजेंसियों की लिस्ट में लंबे समय से वांछित चेहरा थी. मौके से एक पिस्टल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य नक्सली सामग्री भी बरामद हुई है.

नक्सली रूपी का शव बरामद

कांकेर के एसपी निखिल राखेचा ने बताया कि यह ऑपरेशन पुख्ता खुफिया सूचना के आधार पर चलाया गया था. मुठभेड़ के बाद एक महिला माओवादी कमांडर का शव मिला है, जिसकी पहचान रूपी के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि रूपी को लगातार आत्मसमर्पण के लिए समझाया जा रहा था, लेकिन उसने हथियार नहीं छोड़े. आखिरकार वही रास्ता उसे मौत तक ले गया.

नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील

पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पट्टलिंगम ने कहा कि माओवादी कैडरों के सामने आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर देते हुए शासन की ओर से लगातार अपील की जाती रही है, जिसके प्रभाव से विगत महीनों में काफी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों ने पुनर्वास का मार्ग अपनाया है. किंतु रूपी जैसे कुछ कैडरों ने पुनर्वास के मार्ग को छोड़कर हिंसात्मक रास्ता अपनाया, जिसका परिणाम आज उनके अंत के रूप में सामने आया है.

कांकेर में अब बचे 10 नक्सली

आईजीपी बस्तर ने शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से अपील की कि उनके पास अब बहुत सीमित समय शेष है. वे सभी हिंसा के मार्ग को त्यागें और समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, कांकेर इलाके में अब लगभग 10 नक्सली ही सक्रिय बचे हैं. उनकी तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन जारी है. रूपी का मारा जाना सिर्फ एक मुठभेड़ नहीं, बल्कि बस्तर में कमजोर पड़ते नक्सली नेटवर्क पर एक और करारा प्रहार माना जा रहा है.

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