Durg Opium Farming Case: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा-झेंझरी गांव में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है. जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब 11 एकड़ जमीन पर उगाई गई अफीम की फसल पकड़ी गई है. इस मामले में (bjp leader vinayak tamrakar ) भाजपा नेता विनायक ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. जब्त की गई अफीम की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
सरपंच की शिकायत के बाद खुला मामला
बताया गया कि समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने इस मामले की शिकायत की थी. इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और जिला प्रशासन को सूचना दी. दुर्ग कलेक्टर के निर्देश पर चार विभागों की संयुक्त टीम ने खेतों में पहुंचकर जांच की, जिसमें बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा हुआ.

bjp leader vinayak tamrakar arrested durg opium farming case
मक्का के बीच छिपाकर उगाई गई अफीम
जांच में पता चला कि आरोपियों ने चालाकी से पहले खेत में मक्का बोया था और उसी के बीच अफीम के पौधे लगाए थे, ताकि किसी को शक न हो. करीब 10 से 15 प्रतिशत पौधों पर चीरा लगाने के निशान मिले, जिससे साफ है कि उनसे मॉर्फिन युक्त नशीला पदार्थ निकाला जा चुका था. बाकी करीब 80 प्रतिशत पौधे अभी फूल आने या बढ़ने की अवस्था में थे.
भाजपा नेता की निगरानी में हो रही थी खेती
प्रशासन की जांच में सामने आया कि यह खेती विनायक ताम्रकार की निगरानी में हो रही थी. जमीन शिवनाथ नदी के किनारे स्थित है और इसका कुछ हिस्सा विनायक ताम्रकार और उनके भाई के नाम पर है. वहीं, पास की जमीन उनकी रिश्तेदार प्रीतिबाला ताम्रकार और मधुबाला ताम्रकार के नाम पर बताई गई है, जो लंबे समय से दूसरे शहर में रहती हैं और जमीन की देखरेख विनायक को सौंप रखी थी.

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राजस्थान से लाए गए थे बीज
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के किसान विकास बिश्नोई की देखरेख में यह खेती कराई जा रही थी. वह एक फार्म हाउस में मुनीम के रूप में काम करता था. फरार आरोपी अचला राम जाट पर अफीम के बीज लाने का आरोप है. फिलहाल पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है.

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तीन आरोपी गिरफ्तार, एक की तलाश जारी
पुलिस ने जांच के आधार पर विनायक ताम्रकार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं चौथे आरोपी को पकड़ने के लिए अलग टीम रवाना की गई है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में उगाई गई अफीम की सप्लाई कहां की जाती थी और यह अवैध खेती कब से चल रही थी. गांव के कुछ लोगों का दावा है कि यह काम करीब तीन साल से चल रहा था.
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