मोबाइल आज के समय में बड़ों से अलग बच्चों की लाइफ का भी हिस्सा बन चुका है. कई बार पेरेंट्स कोई काम होने पर बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं, तो कुछ थोड़े समय के लिए बच्चे को स्क्रीन टाइम देते हैं. अगर आप भी इन्हीं पेरेंट्स में से एक हैं, तो ये आर्टिकल आप ही के लिए है. चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में वे बताती हैं, आपका बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है, इस बात पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. साइकोलॉजिस्ट ने 5 ऐसे आम कंटेंट के बारे में बताया है, जो बच्चों के लिए सही नहीं होते हैं. साइकोलॉजिस्ट बच्चों को ये कंटेंट नहीं दिखाने की सलाह देती हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
बच्चे को न देखने दें ये 5 चीजें
नंबर 1- Cocomelonलिस्ट में सबसे पहला नाम आता है कोकोमेलन का. साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, ये सबसे फेमस कार्टून में से एक है, लेकिन बच्चों के लिए ठीक नहीं है. कोकोमेलन में लगातार म्यूजिक, बहुत तेज आवाज, चमकीले रंग और तेजी से बदलने वाले सीन होते हैं. ये बच्चे के दिमाग के लिए हाइली स्टिमुलेटिंग हो सकते हैं और इससे बच्चा हाइपर एक्टिव हो सकता है.
नंबर 2- YouTube Shortsसाइकोलॉजिस्ट कहती हैं, अपने बच्चे को कभी भी यूट्यूब शॉर्ट्स न दिखाएं. यूट्यूब शॉर्ट्स में भी स्क्रीन जल्दी-जल्दी चेंज हो जाती है, बार-बार विजुअल बदलते हैं, म्यूजिक चेंज होता है. ऐसा कंटेंट बार-बार देखने से बच्चे के फोकस करने की आदत कमजोर हो सकती है.
नंबर 3- टॉय अनबॉक्सिंग और हॉल वीडियोटॉय अनबॉक्सिंग और हॉल वीडियो में एक के बाद एक नए खिलौने खोले जाते हैं. इसमें हर बार नया खिलौना, नया सरप्राइज और नई एक्साइटमेंट देखने को मिलती है. श्वेता गांधी के मुताबिक, लगातार ऐसा कंटेंट देखने से बच्चे को लग सकता है कि एक्साइटमेंट या खुशी का मतलब बार-बार नए गिफ्ट्स मिलना या कोई नई चीज मिलना ही होता है. इससे बच्चे पर गलत असर हो सकता है.
नंबर 4- Blippi जैसे वीडियोश्वेता गांधी कहती हैं, Blippi को कई लोग एजुकेशनल कंटेंट मानते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा एक्सप्रेशन, तेज आवाज और बढ़ा-चढ़ाकर बोलने का तरीका भी बच्चे पर गलत असर डाल सकता है. छोटे बच्चे के लिए ये सीखना जरूरी होता है कि असल दुनिया हमेशा इतनी तेजी से चलने वाली या इतनी एक्साइटिंग नहीं होती है.
नंबर 5- Lad and Nikki और Roma Diana जैसे वीडियोइन सब से अलग साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, इस तरह के वीडियो में भी बहुत सारे खिलौने, मेकअप और मस्ती भरी चीजें दिखाई जाती हैं. इससे भी बच्चे को लग सकता है कि नॉर्मल बचपन ऐसा ही होता है या उसे हमेशा नए खिलौने मिलते रहने चाहिए, मेकअप मिलना चाहिए या बच्चे को कभी शांत नहीं बैठना चाहिए. जबकि बच्चे का थोड़ी देर बोर होना भी जरूरी है, तभी वो खुद से नई चीजें सीख पाता है या कुछ नया करने के बारे में सोच पाता है.
श्वेता गांधी कहती हैं, बच्चे को थोड़ी देर के लिए मोबाइल देना ठीक है, लेकिन आप जब भी ऐसा करें, तो इस बात पर ध्यान जरूर दें कि बच्चा मोबाइल में देख क्या रहा है. अपने बच्चे को अच्छा कंटेंट दिखाएं, ऐसी चीजें देखने की आदत डालें, जिससे बच्चा धैर्य रखना या कुछ नया करना सीखे.
यहां देखें वीडियो-
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