अगर आप दिल्ली की भागदौड़ से दूर किसी शांत पहाड़ी और धार्मिक जगह पर जाना चाहते हैं तो उत्तराखंड का थलकेदार एक अच्छा विकल्प हो सकता है. पिथौरागढ़ से करीब 16 किलोमीटर दूर पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर समुद्र तल से लगभग 2,480 मीटर की ऊंचाई पर है. दिल्ली से इसकी दूरी करीब 520 किलोमीटर है. अगर आप अपनी चार से माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ जाना चाहते हैं तो दिल्ली से गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी, टनकपुर और चंपावत होते हुए पिथौरागढ़ पहुंच सकते हैं.
संकरी पगडंडी से पहुंचते हैं मंदिर
जानकारी के अनुसार, इंस्टाग्राम पर the17edits नाम से एक स्टोरी शेयर की गई है. इस स्टोरी में बताया गया है कि थलकेदार मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ते से पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है. दिल्ली से सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में करीब 8 से 10 घंटे लग सकते हैं. पिथौरागढ़ पहुंचने के बााद मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता पहाड़ी और संकरा है, इसलिए यात्रा की तैयारी मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करनी चाहिए.
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शिवलिंग रूप में विराजमान हैं भोलेनाथ
बता दें कि भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में शिवलिंग के रूप में भोलेनाथ की पूजा होती है. स्कंद पुरााण में इस पर्वत का उल्लेख 'स्थाकिल पर्वत' और मंदिर का नाम 'स्थलकेदार' बताया गया है. शिवरात्रि और नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है.
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हिमालय की चोटियों का दिखता है नजारा
थलकेदार की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है. मंदिर से बद्रीनाथ, केदारनाथ, नंदादेवी, त्रिशूल और पंचचूली जैसी हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं. आसपास बांज, बुरांश और खर्सू के जंगल, पहाड़ी गांव और सीढ़ीनुमा खेत इस जगह की खूबसूरती और बढ़ा देते हैं.
यात्रा से पहले रखें इन बातों का ध्यान
बता दें कि ऊंचाई और पैदल चढ़ाई को देखते हुए आरामदायक जूते, पानी और जरूरी सामान साथ रखें. पहाड़ों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना बेहतर रहेगा.
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