विज्ञापन

हम जिन्हें जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं उन्हें ही शब्दों से ठेस क्यों पहुंचाते हैं? जानिए क्या कहता है मनोविज्ञान

Relationship Tips: हमारे आसपास कई लोग अपनी पत्नियों, माताओं और उन दोस्तों को लगातार दुख पहुंचा रहे हैं, जो उनसे बहुत प्यार करते हैं और हमेशा ऐसा कह कर बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि प्यार भी तो उन्हीं से करते हैं तो गुस्सा भी तो करेंगे.

हम जिन्हें जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं उन्हें ही शब्दों से ठेस क्यों पहुंचाते हैं? जानिए क्या कहता है मनोविज्ञान
अपनों पर गुस्सा क्यों किया जाता है?
file photo

Relationship Tips: अक्सर ऐसा कहा जाता है कि जिन्हें ज्यादा प्यार किया जाता है. उनसे ही लड़ा या फिर गुस्सा किया जाता है. यह सुनकर शायद अजीब लगे कि हम अपने प्रियजनों को, जो हमसे जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं, शब्दों से ठेस पहुंचाते हैं, लेकिन यह दुनिया भर के कई लोगों में पाई जाने वाली एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है. हालांकि, ऐसा नहीं है हमारे आसपास कई लोग अपनी पत्नियों, माताओं और उन दोस्तों को लगातार दुख पहुंचा रहे हैं, जो उनसे बहुत प्यार करते हैं और हमेशा ऐसा कह कर बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि प्यार भी तो उन्हीं से करते हैं तो गुस्सा भी तो करेंगे. चलिए आपको बताते हैं हम अपनों को क्यों ठेस पहुंचाते हैं?

यह भी पढ़ें:- Home Care Tips: रोजाना, हफ्ते और महीने में इन चीजों को जरूर करें साफ, एयर क्वालिटी रहेगी बेहतर और तनाव भी होगा कम

सुरक्षा की भावना

हम बाहरी लोगों या उन लोगों के प्रति बहुत विनम्र रहते हैं, जो हमें ज्यादा पसंद नहीं करते, क्योंकि हमें डर रहता है कि अगर हम उनके साथ सख्ती से पेश आएंगे, तो वे हमें छोड़ देंगे. लेकिन जो लोग हमें पसंद करते हैं, उनके साथ हमें ऐसा कोई डर नहीं होता. मनोविज्ञान के मुताबिक, सबसे पहली सोच कि "मैं कुछ भी कर लूं, वे मुझे कभी नहीं छोड़ेंगे" हमें उन पर क्रोधित करती है. हम उन्हें 'आसान निशाना' मानते हैं.

भावनाओं का विस्थापन

हम दिनभर दफ्तर में या बाहर जिन अपमानों और गुस्से का सामना करते हैं, उन्हें दिखा नहीं सकते. घर पहुंचते ही हम अपना सारा दबा हुआ गुस्सा उन लोगों पर निकालते हैं, जो हमसे प्यार करते हैं, क्योंकि बाहरी लोगों पर गुस्सा दिखाने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें इस बहाने से का निशाना बनाते हैं कि वे हमें समझते हैं.

अपेक्षाएं

हम किसी व्यक्ति के जितने करीब होते हैं, उनसे हमारी अपेक्षाएं उतनी ही बढ़ जाती हैं. हम चाहते हैं कि वे बिना कुछ कहे ही हमारी भावनाओं को समझ लें. जब वे हमारी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते तो हमारी निराशा गुस्से में बदल जाती है और हम उन्हें मौखिक रूप से चोट पहुंचाते हैं.

अपनी कमजोरियों को न देख पाना

जो लोग हमसे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, वे हमारे लिए दर्पण के समान होते हैं. जब वे हमारी कमियों को बताते हैं या हमारी कमजोरियों को जानते हैं, तो हम बेचैन हो जाते हैं. उस असुरक्षा की भावना के कारण, हम आत्मरक्षा में दूसरों को शब्दों से दबाने की कोशिश करते हैं.

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com