विज्ञापन

बच्चा घर पर खूब बोलता है लेकिन स्कूल में रहता है शांत, रिसर्च से जानिए इसकी असली वजह

कई माता-पिता को चिंता होने लगती है कि उनका बच्चा घर पर खूब बातें करता है, लेकिन स्कूल में पूरी तरह से चुप रहता है. स्कूल में कुछ नहीं बोलता. जानिए आखिर बच्चा स्कूल में क्यों नहीं बोलता और घर पर क्यों ज्यादा बोलता है.

बच्चा घर पर खूब बोलता है लेकिन स्कूल में रहता है शांत, रिसर्च से जानिए इसकी असली वजह
पेरेंटिंग टिप्स

हर माता-पिता ने शायद यह बात कभी न कभी नोटिस की होगी. घर में जो बच्चा घंटों बातें करता है, सवाल पूछता है और खुलकर बोलता है, वही स्कूल पहुंचते ही शांत और कम बोलने वाला नजर आने लगता है. टीचर अक्सर बताती हैं कि वह क्लास में बहुत कम बोलता है या केवल जरूरत पड़ने पर ही जवाब देता है. ऐसे में माता-पिता को चिंता होने लगती है कि आखिर घर और स्कूल में बच्चे का व्यवहार इतना अलग क्यों है. दरअसल, घर और स्कूल का माहौल अलग होता है. घर में बच्चा सुरक्षित और सहज महसूस करता है, इसलिए खुलकर बात करता है. वहीं स्कूल में नए लोगों, नियमों और दबाव के कारण वह ज्यादा शांत रह सकता है.

रिसर्च बताती है कि कई बच्चे घर के सुरक्षित और परिचित माहौल में ज्यादा सहज महसूस करते हैं, जबकि स्कूल में नए लोगों, सामाजिक दबाव और अलग माहौल के कारण वे खुद को कम व्यक्त करते हैं. चलिए जानते हैं कि इसके पीछे की असली वजह क्या है और माता-पिता को कब चिंता करने की जरूरत है.

यह सिर्फ शर्मीलापन नहीं

घर में खूब बातें करने और बाहर, खासकर स्कूल में लगभग चुप रहने की इस स्थिति का एक नाम भी है, जिसे सेलेक्टिव म्यूटिज्म कहा जाता है. इस समस्या से जूझने वाले बच्चे अक्सर घर पर परिवार के लोगों से खुलकर बात करते हैं, लेकिन स्कूल या दूसरे सामाजिक माहौल में बोलने से बचते हैं. इसके संकेत आमतौर पर तब दिखाई देने लगते हैं जब बच्चा 3 से 4 साल का होता है, हालांकि कई बार इसकी पहचान बाद में होती है, जब स्कूल में उसकी खामोशी लगातार नजर आने लगती है. बच्चों पर किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि कई बच्चे घर में सामान्य रूप से और बहुत अच्छी तरह बात करते हैं, लेकिन स्कूल में बोल नहीं पाते.

सेलेक्टिव म्यूटिज्म क्या है?

यह एक प्रकार का एंग्जाइटी डिसऑर्डर है. इसमें बच्चा घर जैसे सुरक्षित माहौल में सामान्य रूप से बोलता है, लेकिन स्कूल या नए माहौल में उसका तंत्रिका तंत्र तनाव के कारण ब्लॉक हो जाता है. यह जिद्द या शर्मीलापन नहीं, बल्कि डर और तनाव की प्रतिक्रिया है. बच्चों को लगता है कि अगर वे स्कूल में बोलेंगे, तो शिक्षक या अन्य साथी उनका मजाक उड़ाएंगे या वे कुछ गलत बोल देंगे. स्कूल में बहुत सारे नए नियम, अनजान चेहरे और शोर-शराबा होता है, जिससे संवेदनशील बच्चे खुद को असहज महसूस करते हैं और चुप रहना बेहतर समझते हैं.

नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

इस स्थिति को पहचानना आसान नहीं होता, क्योंकि ऐसे बच्चे आमतौर पर किसी तरह की शरारत या परेशानी पैदा नहीं करते. सेलेक्टिव म्यूटिज्म वाले बच्चे अक्सर क्लासरूम में शांत, विनम्र और नियमों का पालन करने वाले होते हैं. इसलिए उनकी चुप्पी को कई बार सिर्फ शर्मीलापन समझ लिया जाता है, जबकि उन्हें वास्तव में मदद की जरूरत हो सकती है. दरअसल, जो बच्चा क्लास में शोर मचाता है या अनुशासन तोड़ता है, उस पर जल्दी ध्यान जाता है, लेकिन एक शांत और आज्ञाकारी बच्चा आसानी से सबकी नजरों से छूट सकता है. यही वजह है कि उसकी समस्या लंबे समय तक सामने नहीं आ पाती.

हालांकि, यह खामोशी बच्चे के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकती है. कुछ बच्चे स्कूल में पूरे साल या उससे भी ज्यादा समय तक टीचर से एक शब्द तक नहीं बोल पाते. कई बार वे इतनी झिझक या चिंता महसूस करते हैं कि उन्हें टॉयलेट जाने की अनुमति मांगने जैसी जरूरी बात कहने में भी परेशानी होती है. इसलिए अगर बच्चा लगातार अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों में बोलने से बचता है, तो इसे सिर्फ शर्मीलापन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

स्टडी में क्या मिला?

यूरोपियन चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री जर्नल में छपी एक स्टडी में 24 बच्चों पर छह महीने तक एक खास कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) का असर देखा गया. स्टडी में पाया गया कि एक साल बाद, दो-तिहाई बच्चों में 'सेलेक्टिव म्यूटिज़्म' के लक्षण पूरी तरह खत्म हो गए थे. छोटे बच्चों में ज्यादा सुधार देखा गया. तीन से पांच साल की उम्र के 78 प्रतिशत बच्चे ठीक हो गए, जबकि छह से नौ साल की उम्र के बच्चों में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत था. यहां उम्र का वाकई असर पड़ता है, इसलिए समस्या के अपने-आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय, शुरुआती दौर में ही इस पर ध्यान देना जरूरी है.

यह भी पढ़ें:- प्यार कोई स्कोरबोर्ड नहीं है, रिश्ते में इन 5 चीजों की गिनती न करें, वरना बढ़ सकती हैं दूरियां

यह भी पढ़ें:- टीनएजर्स माता-पिता की बात क्यों नहीं मानते, वे असल में क्या चाहते हैं, रिसर्च से जानिए पेरेंट्स क्या करें

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Parenting Tips, Parenting Tips & Tricks, Child
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com