रिश्ते की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसमें जीत-हार नहीं होती, बल्कि साथ निभाने की भावना होती है, लेकिन जब पार्टनर हर बात का हिसाब रखने लगते हैं, जैसे किसने पहले माफी मांगी, किसने ज्यादा समझौता किया या किसने ज्यादा प्रयास किए, तो प्यार धीरे-धीरे एक स्कोरबोर्ड में बदलने लगता है. रिश्ते में स्कोरबोर्ड रखने का मतलब है पार्टनर की गलतियों, एहसानों या कोशिशों का हिसाब रखना. इसमें एक पार्टनर यह याद रखता है कि उसने रिश्ते के लिए क्या किया और दूसरे ने कहां गलती की, ताकि वक्त आने पर उसे नीचा दिखाया जा सके. यह आदत किसी भी खुशहाल रिश्ते को धीरे-धीरे खत्म कर देती है. ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता भरोसे और अपनापन से भरा रहे, तो कुछ बातों की गिनती करना आज ही बंद कर दें. चलिए आपको बताते हैं वे 5 चीजें जिनका स्कोर रखने से रिश्ते को नुकसान पहुंच सकता है.
घर के काम कौन ज्यादा करता है?
घर की जिम्मेदारियों के बारे में बात करना जरूरी है, खासकर तब जब किसी एक व्यक्ति पर काम का बोझ ज्यादा हो, लेकिन हर छोटे-मोटे काम का हिसाब रखने से डेली लाइफ एक प्रतियोगिता में बदल सकती है. मैंने खाना बनाया, इसलिए तुम्हें बर्तन धोने चाहिए. यह बात कभी-कभी तो ठीक लग सकती है, लेकिन जब हर छोटी मदद का बदला चुकाना जरूरी हो जाता है, तो रिश्ते की मिठास खत्म होने लगती है.
पहले माफी कौन मांगता है?
सबसे पहले माफी मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी तरह से गलत थे. कभी-कभी एक पार्टनर सबसे पहले पहल करता है, क्योंकि उसके लिए अपनी बात सही साबित करने से ज्यादा जरूरी तनाव को खत्म करना होता है. सिर्फ इसलिए कि पिछली बार आपने माफी मांगी थी, अब दूसरे व्यक्ति के माफी मांगने का इंतजार करने से एक छोटी-सी बहस जरूरत से ज्यादा लंबी खिंच सकती है.
प्यार की पहल कौन करता है?
जब आपको लगे कि हमेशा आप ही पहला मैसेज भेजते हैं, डेट प्लान करते हैं या प्यार जताने की पहल करते हैं. अगर यह एक आदत बन जाए, तो इस पर बात करना ज़रूरी है, लेकिन हर बार गले मिलने, डेट के लिए बुलाने या गुड नाईट टेक्स्ट को गिनने से उस चीज का मज़ा खत्म हो सकता है जो अपने-आप और दिल से होनी चाहिए.
किसने ज्यादा त्याग किया है?
यह हिसाब रखना बंद करना सबसे मुश्किल कामों में से एक हो सकता है. हो सकता है कि एक व्यक्ति ने शहर बदला हो, दूसरे ने नौकरी बदली हो, एक ने वीकेंड का प्लान छोड़ा हो, दूसरे ने अपनी दिनचर्या में बदलाव किया हो. इसकी गिनती करने से शायद ही कभी कोई फायदा होता है. रिश्तों में समझौते शामिल होते हैं और किसी के लिए आप जो चीजें छोड़ते हैं, उन्हें बार-बार इस सबूत के तौर पर नहीं लाया जाना चाहिए कि आपने कितना ज्यादा किया है. अगर किसी त्याग की वजह से आपको बुरा लग रहा है, तो अगली बहस के लिए उसे बचाकर रखने के बजाय, जब वह हो तभी उस पर बात करें.
कौन ज्यादा परवाह करता है?
रिलेशनशिप में केयर करने की मात्रा किसी एक लिंग या निश्चित व्यक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह दोनों साथियों के स्वभाव, भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके और उनकी अटैचमेंट स्टाइल पर निर्भर करती है.
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