बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, माता-पिता की कोशिश रहती है कि वह जल्दी-जल्दी नई चीजें सीख जाए. इसमें भी पढ़ाई-लिखाई पर पेरेंट्स का ज्यादा जोर रहता है. हालांकि, बच्चों को नई चीजें सीखाना उतना आसान नहीं होता है. खासकर लिखना सिखाते वक्त माता-पिता को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. यहां हम आपको बच्चों को लिखना सिखाने का सही और बेहद आसान तरीका बता रहे हैं. ये खास तरीका फेमस पीडियाट्रिशियन अर्पित गुप्ता ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
कैसे करें शुरुआत?
पीडियाट्रिशियन बताते हैं, ज्यादातर माता-पिता लिखना सिखाते वक्त ABCD या 1234 से शुरुआत करते हैं या बच्चे को हिंदी के अक्षर लिखने के लिए कहते हैं. लेकिन ये सही तरीका नहीं है. बच्चा सीधे अक्षर लिखना शुरू नहीं करता है और इस तरह उसे चीजें सीखने में ज्यादा समय लग सकता है.
तो क्या करें?पीडियाट्रिशियन के मुताबिक, लिखने से पहले बच्चे के हाथों की पकड़, उंगलियों की ताकत और आंखों-हाथों का तालमेल अच्छा होना जरूरी है. इसके लिए-
सबसे पहले बच्चे को खुलकर पेंसिल चलाने देंडॉक्टर सबसे पहले बच्चे से स्क्रिबलिंग कराने के लिए कहते हैं. यानी बच्चे को कागज पर पेंसिल या क्रेयॉन से अपनी मर्जी से कुछ भी बनाने दें. वह टेढ़ी-मेढ़ी लाइन बनाए, कोई निशान बनाए या गोल-गोल पेंसिल चलाए, तो उसे ऐसा करने दें. बच्चे को पहले हाथ चलाना सीखने दें, बिना डर के पेंसिल चलाने दें. इससे उसे पेंसिल पकड़ने और हाथ को आगे-पीछे चलाने की आदत होगी.
इसके बाद कराएं कंट्रोल्ड स्क्रिबलिंगजब बच्चा आसानी से पेंसिल चलाने लगे, तो अगला कदम कंट्रोल्ड स्क्रिबलिंग है. इसमें बच्चे को एक तय जगह के अंदर लाइन या निशान बनाने के लिए कहा जा सकता है. जैसे आप कागज पर एक छोटा बॉक्स बनाकर बच्चे को उसके अंदर पेंसिल चलाने को कहें. इससे बच्चे को हाथ की हरकत को कंट्रोल करना सीखने में मदद मिलेगी.
अब सीधी लाइन बनाना सिखाएंइसके बाद बच्चे को तीन तरह की सीधी लाइन बनाना सिखाएं-
- खड़ी लाइन यानी ऊपर से नीचे
- लेटी हुई लाइन यानी एक तरफ से दूसरी तरफ और
- तिरछी लाइन यानी स्लांटिंग लाइन
इन लाइनों की प्रैक्टिस करने से बच्चा आगे चलकर कई अक्षर और नंबर आसानी से लिख पाएगा.
कर्व और आसान पैटर्न बनवाएंसीधी लाइन के बाद बच्चे को घुमावदार लाइन यानी कर्व बनाना सिखाएं. इसके बाद कुछ आसान पैटर्न बनवाएं. जैसे लाइन को ऊपर-नीचे करना, घुमाना या एक जैसी आकृति बार-बार बनाना. इससे बच्चे का अपने हाथ और उंगलियों पर कंट्रोल होने लगेगा.
डॉट्स जोड़ने की प्रैक्टिस कराएंइसके बाद कागज पर दो डॉट बनाएं और बच्चे से इन डॉट्स को लाइन बनाकर जोड़ने के लिए कहें. जब वह दो डॉट आसानी से जोड़ने लगे, तो कई डॉट लगाकर उन्हें जोड़ने का अभ्यास कराएं. यह डॉट-टू-डॉट अभ्यास बच्चे को यह समझने में मदद करता है कि हाथ को एक जगह से दूसरी जगह किस दिशा में ले जाना है.
आखिर में शुरू करें अक्षर लिखवाना
जब बच्चा स्क्रिबलिंग, लाइन, कर्व, पैटर्न और डॉट जोड़ने की प्रैक्टिस कर ले, तब उसे अक्षर लिखाना शुरू किया जा सकता है. पीडियाट्रिशियन कहते हैं, इस तरह बच्चे के हाथ को पहले लिखने के लिए तैयार किया जाता है और फिर उसे ABCD या दूसरे अक्षर सिखाए जाते हैं.
इस बात का रखें ध्यानपीडियाट्रिशियन अर्पित गुप्ता कहते हैं, हर बच्चा एक जैसा नहीं होता है. एक उम्र में कोई बच्चा चीजें जल्दी सीख सकता है, तो किसी बच्चे को वही चीज सीखने में थोड़ा समय भी लग सकता है. इसलिए बच्चे को जल्दी लिखना सिखाने के लिए उस पर दबाव न डालें. रोज थोड़े समय के लिए खेल-खेल में बच्चे से प्रैक्टिस कराएं. इससे बच्चा बिना किसी दबाव के खुश होकर लिखना सीख पाएगा.
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