बच्चा जब पहली बार झूठ बोलता है, तो माता-पिता को समझ नहीं आता कि उससे कैसे बात करें. कई पेरेंट्स तुरंत गुस्सा कर देते हैं, डांटते हैं और बच्चे को समझाते हैं कि झूठ बोलना गलत है. लेकिन कई बार इसके बाद भी बच्चा झूठ बोलना बंद नहीं करता. ऐसे में पेरेंट्स के मन में सवाल आता है कि वे क्या करें जिससे बच्चा उनकी बात को समझें और झूठ बोलने की आदत को छोड़ दे. अगर आपके मन में भी ये सवाल है, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. पेरेंटिंग एक्सपर्ट देबमिता दत्ता ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है. अपनी इस पोस्ट में एक्सपर्ट ने बताया है कि आखिर बच्चे झूठ बोलते क्यों हैं और कैसे इस आदत को रोका जा सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में-
क्या कहती हैं एक्सपर्ट?
देबमिता दत्ता बताती हैं, ज्यादातर मामलों में बच्चे 3 कारण से झूठ बोलते हैं.
पहली वजह: बच्चे को लगता है कि आप उसे समझते नहींटीनएज में बच्चों की जिंदगी में दोस्त और स्कूल बहुत मायने रखते हैं. दोस्तों से झगड़ा होना, किसी दोस्त का उन्हें बाहर घूमने के लिए न बुलाना या दोस्तों के बीच कोई परेशानी होना माता-पिता को छोटी बात लग सकती है. लेकिन बच्चे के लिए यही बातें बहुत बड़ी होती हैं.
ऐसे में अगर बच्चा अपनी परेशानी लेकर आपके पास आए, तो उसकी बात को छोटा न समझें. बच्चे से यह नहीं कहें कि 'इतनी सी बात के लिए परेशान क्यों हो रहे हो?' इसके बजाय आराम से उसकी बात सुनें. उससे पूछें कि उसे कैसा लग रहा है और उसकी परेशानी को समझने की कोशिश करें. जब बच्चे को लगेगा कि उसके माता-पिता उसकी भावनाओं को समझते हैं, तो वह अपनी बातें छिपाने के बजाय खुलकर बताना शुरू करेगा.
दूसरी वजह: गलती या खराब रिजल्ट का डरकई बच्चों को डर रहता है कि अगर उन्होंने अपनी गलती या खराब रिजल्ट के बारे में सच बताया, तो माता-पिता बहुत नाराज होंगे. इसी डर की वजह से वे बातें छिपाने लगते हैं या झूठ बोलने लगते हैं.
ऐसी स्थिति में बच्चे पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय उससे बात करें. जानने की कोशिश करें कि गलती कहां हुई और आगे उसे कैसे ठीक किया जा सकता है. बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि कम नंबर आना या किसी काम में गलती हो जाना उसे खराब बच्चा नहीं बनाता. गलती से सीखना ज्यादा जरूरी है.
तीसरी वजह: हर बात पर 'नहीं' सुननाटीनएज में बच्चे नई चीजें जानना और खुद कुछ फैसले लेना चाहते हैं. वे दोस्तों के साथ बाहर जाना चाहते हैं, नई जगह जाना या कुछ नया आजमाना चाहते हैं. अगर माता-पिता उनकी हर बात पर बिना सुने सिर्फ 'नहीं' कहते हैं, तो बच्चे को लग सकता है कि सच बताने का कोई फायदा नहीं है.
इसलिए हर बात पर तुरंत मना करने के बजाय पहले बच्चे की बात सुनें. अगर उसकी बात में कोई खतरा है, तो उसे समझाएं कि वह काम किस तरह सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है. इस तरह आपका बच्चा आपको सच बताने लगेगा और आपसे कोई बात छिपाएगा नहीं.
बच्चों को कंट्रोल नहीं, भरोसा चाहिएपेरेंटिंग एक्सपर्ट कहती हैं, बच्चे के झूठ बोलने की आदत को खत्म करने के लिए उस पर सख्ती करना सही तरीका नहीं है. उससे ज्यादा जरूरी है कि उसे माता-पिता पर भरोसा हो. बच्चा यह महसूस करे कि वह अपनी परेशानी, गलती और डर के बारे में घर पर खुलकर बात कर सकता है. ऐसे में अगली बार जब आपका बच्चा आपसे झूठ बोले, तो सिर्फ न सोचें कि 'इसने झूठ क्यों बोला?' बल्कि यह भी सोचें कि 'इसे सच बताने में डर किस बात का था?'
बच्चों को समझ, प्यार और भरोसे की जरूरत होती है. जब घर में बातचीत का माहौल होगा और बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करेगा, तो उसके लिए सच बोलना भी आसान होगा.
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