JSSC CGL Latest News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा और उससे जुड़ी सिलेक्शन प्रोसेस को रद्द करने का फैसला किया. साथ ही TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित दूसरी परीक्षाओं और कुछ विवादित JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की गई. यह फैसला लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच आया है. इनमें सबसे बड़ा असर JSSC-CGL के जरिए सिलेक्टेड 1,975 अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है. परीक्षा पास कर चुके और नौकरी पा चुके लगभग 1,900 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा संकट आ गया है.
कहीं खुशी कहीं गमझारखंड में JSSC CGL परीक्षा रद्द किए जाने के सरकार के फैसले के बाद जहां एक ओर परीक्षा रद्द होने से गड़बड़ी की शिकायत करने वाले प्रदर्शनकारी छात्रों में खुशी है, वहीं परीक्षा पास कर नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों में नाराजगी है. JSSC CGL के उम्मीदवार, जिन्होंने परीक्षा पास की थी, राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ प्रोजेक्ट भवन में प्रोटेस्ट कर रहे हैं.
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा, कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद हमारी नियुक्ति हुई थी. हमारे पास सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी की मुहर थी, फिर भी अचानक सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया. एक पल में हम बेरोजगार हो गए. हम मुख्यमंत्री से नाराज हैं. प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को कम से कम इस मामले पर फिर से विचार करें. माननीय कोर्ट के रुख का क्या? हमारे उन सैकड़ों भाइयों का क्या होगा जिन्होंने पिछली नौकरियों से इस्तीफा देकर यह नौकरी ज्वाइन की है? हम कोर्ट जाएंगे. हम पहले भी कोर्ट के जरिए इस स्टेज तक पहुंचे हैं, इसलिए हम फिर से कोर्ट जाएंगे.
''मैं अकेला रह गया हूं''
एक अभ्यर्थी ने कहा, सरकार के फैसले के बाद, मैं अकेला रह गया हूं. हम एक निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए शामिल हुए थे, तो ऐसा कदम क्यों उठाया जा रहा है? हमारा कहना है कि जांच की जाए. अगर जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उन खास लोगों को हटा दिया जाए.
प्रदर्शन कर रहे चंदा कुमारी ने बात करते हुए कहा कि हमारी न्यायपालिका और लोकतंत्र इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि भले ही 100 दोषी लोग छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं मिलनी चाहिए. लेकिन सरकार के इस फैसले से हजारों निर्दोष लोगों को तुरंत सजा मिल गई है. क्या परीक्षा रद्द करना सिस्टम को बेहतर बनाने का सही तरीका है? क्या इससे असल में दोषी लोगों को न्याय मिल पाएगा? पिछले 24 दिनों से सरकार ने सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी है और दूसरे पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया है. सिर्फ एक पक्ष की बात सुनकर फैसला लेना कहां तक सही है? हमें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया.
वहीं, झारखण्ड के पूर्व महाधिवक्ता अजित कुमार ने कहा कि JSSC (CGL) के तहत हुई जो नियुक्ति रद्द की गयी है. वह सशर्त हुई थी. उनके नियुक्ति पत्र में ही यह लिखा हुआ था की CID जांच के अंतिम निर्णय से उनकी नियुक्तियां प्रभावित होगी. इसलिए इसमें कोई न्यायकि अड़चन नहीं आयेगी...
अब सरकार क्या करेगी...?परीक्षा रद्द होने के बाद अब सरकार के सामने सिर्फ नई परीक्षा कराने की चुनौती नहीं है, बल्कि उन अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की भी जिम्मेदारी है, जिन्होंने पिछली प्रक्रिया में चयन हासिल किया था. खास तौर पर ऐसे अभ्यर्थी जो अब निर्धारित उम्र सीमा पार कर चुके हैं या पहले से किसी नौकरी में कार्यरत हैं, उनके लिए सरकार क्या प्रावधान करेगी, यह बड़ा सवाल है. सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि नई भर्ती प्रक्रिया में इन अभ्यर्थियों के हितों की किस तरह रक्षा की जाएगी.
यानी परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद असली परीक्षा अब सरकार की अगली कार्य योजना की है. नई परीक्षा कब होगी, पुरानी प्रक्रिया में चयनित अभ्यर्थियों के साथ क्या होगा और उम्र सीमा पार कर चुके उम्मीदवारों को क्या राहत दी जाएगी. इन सवालों पर सरकार के फैसले का इंतजार है. फिलहाल, परीक्षा रद्द होने से विवाद पर पूर्ण विराम नहीं लगा है; आगे की प्रक्रिया और सरकार के अगले आदेश से ही यह तय होगा कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर तस्वीर क्या बनती है.
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