बिहार सरकार ने यूनिवर्सिटीज में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. राज्यपाल सचिवालय ने भर्ती व्यवस्था की रिव्यू करने और जरूरी सुधार सुझाने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है. आइए जानते हैं कमेटी में कौन-कौन है, किन चीजों की समीक्षा की जाएगी और क्यों बनाई गई कमेटी...
90 दिनों में देनी होगी रिपोर्टएक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कमेटी अपनी जांच पूरी कर 90 दिनों के भीतर लोक भवन में रिपोर्ट सौंपेगी. रिपोर्ट में रिक्रूटमेंट प्रोसेस से जुड़े कंक्लूजन के साथ ऐसे सुझाव भी शामिल होंगे जिन्हें प्रैक्टिकली लागू किया जा सके.
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गवर्नर सचिवालय में एडिशनल सेक्रेटरी (यूनिवर्सिटी) संजय कुमार को कमिटी का सदस्य सचिव बनाया गया है. पैनल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमरजीत सिन्हा और प्रसिद्ध फिजिसिस्ट (Physicist) और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. एच.सी. वर्मा सहित कुल कई सदस्य शामिल हैं.
किन मुद्दों पर होगी समीक्षा?यह कमिटी अधिकतम उम्र सीमा, एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, रिटेन एग्जाम और इंटरव्यू का स्वरूप, विभिन्न मानकों का वेटेज, गेस्ट लेक्चर से जुड़े मुद्दे और अन्य संबंधित विषयों की समीक्षा करेगी.
बता दें कि रिक्रूटमेंट प्रोसेस में पारदर्शिता और योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर देने के मकसद से इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा.
छात्रों के आंदोलन के बाद बना पैनलकमिटी का गठन पिछले साल राज्यपाल और 'ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्चर्स एसोसिएशन' के प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते के आधार पर किया गया है.
विदित हो कि एसोसिएशन से जुड़े अभ्यर्थियों ने पिछले महीने करीब तीन सप्ताह तक आंदोलन चलाया था. यही नहीं कई अभ्यर्थियों ने पटना के गर्दनीबाग में भूख हड़ताल भी की थी. बाद में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अता हसनैन के साथ करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था.
क्या थीं अभ्यर्थियों की मांगें?प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 साल करने और सिलेक्शन प्रोसेस में ऑब्जेक्टिव टाइप लिखित परीक्षा शामिल करने की मांग प्रमुख थी. राज्यपाल ने उस समय आश्वासन दिया था कि मांगों की समीक्षा के लिए शिक्षाविदों और प्रशासनिक विशेषज्ञों की कमेटी गठित की जाएगी. उसी को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है.
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