- तेलंगाना में बारिश गायब, किसान टैंकरों से बचा रहे धान की फसल
- तेलंगाना में गहराया कृषि संकट, जलाशयों में 40% कम हुआ पानी
- फसल बचाने की जंग, किसान बोले- मुनाफा हो या नहीं, फसल नहीं छोड़ेंगे
तेलंगाना में इस बार बारिश की भारी कमी और लगातार बने सूखे जैसे हालात ने किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. राज्य के कई जिलों में धान की खड़ी फसलें पानी के अभाव में प्रभावित हो रही हैं और किसान अतिरिक्त खर्च करके टैंकरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचा रहे हैं. जलाशयों में घटते जल भंडारण, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की कमी और बिजली आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ा दिया है. ऐसे में किसान फसलों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं.
फसल बचाने के लिए टैंकरों का सहारा
NDTV की टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि तेलंगाना के विभिन्न जिलों में किसान खड़ी फसलों को बचाने के लिए असामान्य उपाय अपनाने पर मजबूर हैं. हनमकोंडा जिले के हसनपर्थी मंडल के अनंतसागर गांव के किसान श्याम सुंदर रेड्डी ने अपनी आठ एकड़ धान की फसल को सूखने से बचाने के लिए चार पानी के टैंकर मंगवाए हैं.
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खेतों को पानी के टैंकर का सहारा
Photo Credit: NDTV
किसान नरसैया का कहना है कि चाहे लाभ हो या नहीं, लेकिन इस अवस्था तक पहुंच चुकी फसल को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता. उन्होंने सरकार से किसानों की जरूरतों पर अधिक ध्यान देने और पर्याप्त पानी व भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की मांग की.
बारिश में 95 प्रतिशत की भारी कमी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच तेलंगाना में सामान्य 75.6 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 3.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह लगभग 95 प्रतिशत की कमी है. इस अवधि में राज्य के 12 जिलों में एक बूंद बारिश तक दर्ज नहीं हुई. वहीं दक्षिण-पश्चिम मानसून भी सामान्य से कम बारिश के साथ समाप्त हुआ. पूरे सीजन में 740.6 मिमी के सामान्य आंकड़े के मुकाबले केवल 615.5 मिमी वर्षा हुई, जो 17 प्रतिशत की कमी दर्शाती है.

खेत में पाइप से पानी डालता किसान
Photo Credit: NDTV
जलाशयों में तेजी से घटा जल भंडारण
बारिश की कमी का असर राज्य के जल संसाधनों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार कृष्णा और गोदावरी बेसिन के प्रमुख एवं मध्यम जलाशयों में 30 सितंबर तक कुल 503.43 टीएमसी पानी उपलब्ध था.
जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो रबी सीजन की फसलों पर भी असर पड़ सकता है.
315 मंडलों में सूखे जैसे हालात
राज्य सरकार ने प्रारंभिक आकलन में 315 मंडलों में सूखे जैसी स्थिति की पहचान की है. इनमें 101 मंडलों को गंभीर रूप से प्रभावित और 214 मंडलों को मध्यम रूप से प्रभावित श्रेणी में रखा गया है. फसल नुकसान और वर्षा की कमी से प्रभावित किसानों के लिए सरकार ने 1,986.89 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज का प्रस्ताव भी तैयार किया है.
बिजली मांग बढ़ने से बढ़ी चुनौती
कृषि संकट के बीच बिजली व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है. 9 सितंबर को तेलंगाना में बिजली की अधिकतम मांग 19,543 मेगावाट दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में दर्ज 15,906 मेगावाट की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती मांग के बावजूद बिजली आपूर्ति बनाए रखी गई है, लेकिन कई किसानों ने स्थानीय स्तर पर सिंचाई के लिए बिजली उपलब्धता को लेकर समस्याएं बताई हैं.
खेती-किसानी के मुद्दे पर तेज हुई राजनीति
कृषि संकट को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने कांग्रेस सरकार पर उपलब्ध नदी जल का समुचित उपयोग नहीं करने और प्रमुख लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का संचालन नहीं करने का आरोप लगाया है. केटीआर ने दावा किया कि 1 जून के बाद बड़ी मात्रा में गोदावरी और कृष्णा नदी का पानी नीचे की ओर बह गया. उन्होंने पालमूरु-रंगारेड्डी और कलवकुर्थी लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के संचालन पर भी सवाल उठाए. हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
किसानों के सामने बढ़ती चिंता
अल नीनो से जुड़ी चिंताओं ने भविष्य में वर्षा की अनिश्चितता को लेकर आशंकाएं और बढ़ा दी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जलाशयों का बेहतर प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई प्रणाली अपनाना समय की आवश्यकता है. फसलों पर बढ़ते खतरे और किसानों पर बढ़ते अतिरिक्त खर्च को देखते हुए विश्वसनीय कृषि बिजली, समय पर सूखा राहत और प्रभावी जल प्रबंधन फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हैं.
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