वोटर लिस्ट में SIR में कथित गड़बड़ियों के आरोप में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन की तैयारी की है. उधर, इंडिया गठबंधन भी पिछले चार दिनों से इसी मांग को लेकर सड़कों पर है. सरकार ने इन दोनों ही मोर्चों पर निपटने की मजबूत तैयार कर ली है.
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सीजेपी के पिछले आंदोलन से कई सबक लिए हैं. पिछली बार नीट पेपर लीक के विरोध में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था. तब सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे हुए थे. बाद में उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया था लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ था.
20 जुलाई को संसद के घेराव के लिए हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया था. प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन खत्म किया था.
लेकिन इस बार सरकार तैयार
इस बार सरकार की तैयारी पूरी है. पिछली बार सीजेपी के नेताओं को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे दी गई थी. इसी कारण वहां जमावड़ा होता गया. उस विरोध प्रदर्शन में छात्रों के साथ ही आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और चंद्रशेखर के समर्थक जुटे.
दिल्ली पुलिस ने इस बार सीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी. जंतर मंतर जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया है.

कल सुबह चार बजे से दोपहर दो बजे तक नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया. नई दिल्ली एरिया के कई मेट्रो स्टेशन बंद करने का ऐलान किया गया है. किसी भी सूरत में धरने पर बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
सरकार का क्या है मानना?
सरकार के सूत्रों के अनुसार, SIR का मुद्दा नीट पेपर लीक जैसा भावनात्मक मुद्दा नहीं है. इस मुद्दे पर वैसा जन समर्थन नहीं है जैसा पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या को लेकर था.
छह बड़े शहरों में सर्वे कराया गया है, जिसमें 72 प्रतिशत लोगों ने SIR का समर्थन किया है. वे मानते हैं कि वोटर लिस्ट की सफाई जरूरी है. यह जरूर है कि इस प्रक्रिया में कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है. लेकिन चुनाव आयोग अपनी ओर से इस प्रक्रिया को सुगम बनाने की पूरी कोशिश कर रहा है.
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में अगले एक सप्ताह में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी जिसके बाद अगर किसी मन में इसे लेकर कोई भ्रांति भी है तो वह दूर हो जाएगी.
इंडिया ब्लॉक में भी सब ठीक नहीं!
सरकारी सूत्र कहते हैं कि इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन में भी एक राय नहीं है. जिस तरह से आंदोलन की कमान राहुल गांधी अपने हाथों में लेना चाह रहे हैं, उससे कई अन्य सहयोगी दल खुश नहीं हैं.
वे उदाहरण के लिए शिवसेना यूबीटी और समाजवादी पार्टी का हवाला देते हैं. साथ ही सूत्रों का दावा है कि खुद कांग्रेस में भी इस मुद्दे को लेकर बहुत उत्साह नहीं है वरना चालीस सांसद नदारद नहीं होते.
दूसरी ओर बीजेपी आक्रामक अभियान के जरिए कांग्रेस को जवाब दे रही है. वह SIR को लेकर उठे सवालों का जवाब दे रही है वहीं महिला पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना भी साध रही है.
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस का अभियान लोकतंत्र को कमजोर करने के इरादे से किया जा रहा है.
सरकार और बीजेपी के रुख से यह साफ है कि वे इस आंदोलन को बड़ा रूप लेने नहीं देंगे. पिछली बार हालात हाथ से निकल गए थे. इस बार ऐसा नहीं होने देने की रणनीति बनाई गई है. अब यह आने वाले समय में पता चलेगा कि यह रणनीति कितनी कामयाब रहती है.
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