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रूसी तेल पर भारत के खिलाफ क्यों नहीं गए ट्रंप ? रुबियो ने बताई वजह, पाकिस्तान पर भी दिया बड़ा भरोसा

रूसी तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ टैरिफ क्यों नहीं लगाया गया? मार्को रुबियो ने ट्रंप के फैसले की वजह बताते हुए भारत-US रिश्तों और पाकिस्तान से नजदीकी पर भी खुलकर जवाब दिया.

रूसी तेल पर भारत के खिलाफ क्यों नहीं गए ट्रंप ? रुबियो ने बताई वजह, पाकिस्तान पर भी दिया बड़ा भरोसा

रूस से तेल खरीदने के बावजूद अमेरिका ने भारत पर संबंधित टैरिफ क्यों नहीं लगाए? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसके पीछे भारत-अमेरिका के रिश्तों को बड़ी वजह बताया है. रुबियो के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझते हैं कि ऐसा कदम भारत के साथ अमेरिका के बेहद अहम संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता था. उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी टैरिफ का मकसद भारत को सजा देना या नुकसान पहुंचाना नहीं है. इसके साथ ही रुबियो ने पाकिस्तान से अमेरिका की बढ़ती नजदीकी को लेकर भारत की चिंताओं पर भरोसा दिया कि किसी भी देश के साथ वॉशिंगटन के संबंध भारत के साथ रिश्तों की कीमत पर नहीं होंगे. वीजा और H-1B से जुड़ी सख्ती पर भी उनका कहना है कि ये कदम भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाए जा रहे.

भारत पर टैरिफ क्यों नहीं?

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रुबियो ने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर उठाए जाने वाले कदम भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों पर दबाव पैदा कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिका रूस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. इस प्रक्रिया में टैरिफ भी उसकी व्यापक विदेश नीति का हिस्सा हैं, लेकिन इनका उद्देश्य भारत को नुकसान पहुंचाना नहीं है. रुबियो तर्क दिया कि ट्रंप ने रूसी तेल के मामले में भारत पर कानून के तहत अपेक्षित टैरिफ नहीं लगाए और इसके लिए अमेरिका में उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी.

ट्रंप ने रिश्तों को दी अहमियत

रुबियो ने इसकी वजह भी साफ की है. उनके मुताबिक ट्रंप समझते थे कि ऐसे टैरिफ लगाने से भारत के साथ अमेरिका के बेहद महत्वपूर्ण रिश्ते पर गंभीर नकारात्मक असर हो सकता है. उन्होंने इसे विदेश नीति में संतुलन बनाने की कोशिश बताया. एक तरफ अमेरिका रूस और यूक्रेन को बातचीत की मेज तक लाने के लिए दबाव बनाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ वह ऐसे कदमों से दूसरे अहम देशों के साथ अपने रिश्तों में तनाव भी पैदा नहीं करना चाहता. रुबियो ने माना कि दोनों चीजों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है और यह आगे भी चुनौती बना रहेगा.

पाकिस्तान पर दिया बड़ा भरोसा

रुबियो ने अमेरिका और पाकिस्तान की हालिया नजदीकी को लेकर भारत में उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ऐसा देश है जिसके साथ अमेरिका को संबंध रखने की जरूरत है. अमेरिकी प्रभाव का इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों को रोकने में किया जा सकता है, जिनसे संघर्ष की आशंका पैदा हो. लेकिन इसके साथ रुबियो ने भारत को साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान या दुनिया के किसी दूसरे देश के साथ अमेरिका के रिश्ते भारत के साथ संबंधों की कीमत पर आगे नहीं बढ़ेंगे. बातचीत में उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना 1970 के दशक के अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों से किए जाने को भी सही नहीं माना और कहा कि आज की दुनिया उस दौर से बिल्कुल अलग है.

वीजा सख्ती भी भारत के खिलाफ नहीं: रुबियो

भारतीयों के लिए H-1B वीजा, दूसरी वीजा कैटेगरी और अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर बने माहौल पर रुबियो ने कहा कि इन बदलावों को भारत के खिलाफ कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनका तर्क है कि अमेरिका अपने पूरे इमिग्रेशन सिस्टम को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहा है और यह किसी एक देश पर केंद्रित नहीं है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका चाहता है कि लोग वहां आकर पढ़ाई करें, काम करें और निवेश भी करें लेकिन यह सब कानूनी व्यवस्था के तहत होना चाहिए. रुबियो के मुताबिक भारतीयों की संख्या कुछ वीजा कैटेगरी में ज्यादा होने के कारण भारत में इन बदलावों का असर ज्यादा महसूस हो सकता है.

चीन पर भी साफ किया रुख

चीन के प्रति ट्रंप प्रशासन के कथित रूप से नरम पड़ने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि 'नरम' कहना सही शब्द नहीं होगा. उन्होंने कहा कि चीन एक बड़ी अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली देश है और अमेरिका को उसके साथ संबंध बनाए रखने हैं. मतभेद वाले मुद्दों पर अमेरिका कदम उठाता रहेगा, लेकिन कोशिश यह भी है कि दोनों देशों के रिश्ते किसी बड़े और खतरनाक संघर्ष में न बदलें. रुबियो ने कहा कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नुकसानदेह होगा और भारत समेत लगभग हर देश उससे प्रभावित होगा.

यूक्रेन पर भारत की तारीफ

रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर रुबियो का रुख काफी सकारात्मक रहा. उन्होंने भारत की तरफ से संघर्ष खत्म कराने की कोशिशों का स्वागत किया. रुबियो ने कहा कि उन्होंने भारत द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव को भी देखा है. उन्होंने भारतीय कूटनीतिक तंत्र की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने दोनों पक्षों को करीब लाने और बेहद मुश्किल संघर्ष का समाधान तलाशने में सकारात्मक भूमिका निभाई है. कुल मिलाकर रुबियो की बातों से यह संदेश भी सामने आया कि व्यापार, रूसी तेल, वीजा और अमेरिका के पाकिस्तान एवं चीन के साथ संबंधों जैसे मसलों पर मतभेद होने के बावजूद वॉशिंगटन भारत के साथ रिश्तों को अपनी विदेश नीति में अहम मान रहा है. 
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