- राहुल गांधी को 6 साल बाद मानहानि मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से राहत मिली है.
- राहुल आज सुबह सुल्तानपुर पहुंचे थे और सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहे थे.
- राहुल गांधी पर मानहानि का यह मामला अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा हुआ था.
राहुल गांधी को अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में सुल्तानपुर की MP-MLA कोर्ट ने बरी कर दिया है. सुनवाई के दौरान राहुल गांधी कोर्ट में मौजूद थे. बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने यह केस दायर किया था. मामला अगस्त 2018 का है. उस वक्त केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. राहुल गांधी पर बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह पर विवादित टिप्पणी का आरोप था. जिसके बाद यह मामला सुल्तानपुर कोर्ट में दर्ज करवाया गया था. 8 साल बाद इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है, जिसमें राहुल गांधी को बरी कर दिया गया है, यह जानकारी उनके वकील की तरफ से दी गई है.
जज शुभम वर्मा ने राहुल गांधी किया बरी
सुल्तानपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में आज राहुल गांधी सुबह कार्रवाई से पहले पहुंचे थे. जबकि केस लगाने वाले विजय मिश्रा भी मौजूद थे. सुनवाई के दौरान कोर्ट के जज शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को बरी करने का फैसला सुनाया. इस बात की जानकारी उनके वकील काशी प्रसाद शुक्ला की तरफ से दी गई, जो इस केस में राहुल गांधी की पैरवी कर रहे थे. फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल दिखा और कोर्ट के बाहर ढोल बजाकर जश्न मनाया गया. इस दौरान राहुल गांधी के साथ यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना समेत कई सीनियर नेता मौजूद थे.
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कैसे बरी हुए राहुल गांधी
बताया जा रहा है कि साक्ष्यों के आभाव में राहुल गांधी को राहत मिली है. कोर्ट ने माना कि राहुल गांधी ने यह वक्तव्य चुनावी रैली में दिया था, इसलिए यह मजबूत कैस नहीं बनता. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि विजय मिश्रा मामले में पीड़ित व्यक्ति नहीं हैं, इसलिए यह भी राहुल गांधी राहत मिली है.' इन सभी आभावों में राहुल गांधी को राहत मिली है. खास बात यह भी है कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल खुद मौजूद थे.
फैसले को दी जाएगी चुनौती
वहीं फैसले के बाद केस लगाने वाले बीजेपी नेता विजय मिश्रा के वकील संतोष का कहना है कि वह कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन वह इस फैसले को चुनौती देंगे. क्योंकि कोर्ट में राहुल गांधी टिप्पणी की जो सीडी उपलब्ध कराई गई थी, उसे कोर्ट ने मजबूत सबूत माना था. इस आधार पर सजा होना चाहिए थी. लेकिन उन्हें बरी किया गया है. ऐसे में इन सभी मसलों को लेकर हम आगे चुनौती देंगे.
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