- नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल कई लोग असल में मजदूर नहीं पाए गए हैं
- प्रदर्शन को भड़काने के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों का इस्तेमाल कर लोगों को तेजी से जोड़कर उकसाया गया था
- जांच में भड़काऊ पोस्ट और अफवाहें फैलाई गईं जिससे प्रदर्शन हिंसक और आक्रामक बन गया था
नोएडा में हिंसा हुई नहीं थी, करवाई गई थी...? उत्तर प्रदेश के नोएडा में सोमवार को हजारों की संख्या में सड़कों पर उतार आए और उन्हीं फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने लगे, जिनमें वो काम करते हैं. ये वहीं, फैक्ट्रियां हैं, जिनसे उनका घर चलता है, उनकी रोजी-रोटी का इंतजाम होता है. कैसे मजदूरों का ज़मीर ऐसी जगह पर तोड़फोड़ करने के लिए कैसे मान गया. इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. जांच में सामने आया है कि हिंसक प्रदर्शन में शामिल कई लोग मजदूर थे ही नहीं. कई व्हाट्सएप ग्रुपों ने भी हिंसा की आग में घी डालने का काम किया.
रातोंरात WhatsApp ग्रुपों में लोगों किया गया शामिल
पुलिस जांच में पता चला है कि नोएडा में प्रदर्शनकारियों को जुटाने और विरोध को हिंसक बनाने के लिए WhatsApp ग्रुपों का बड़ी संख्सा में इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया. यह प्रक्रिया बेहद तेजी से की गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को रातोंरात इन ग्रुपों में शामिल कर लिया गया. इन ग्रुपों के नाम भी अलग-अलग थे, जिससे उनकी पहचान करना शुरुआती दौर में मुश्किल हो गया.
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भड़काऊ पोस्ट भेज मजदूरों को उकसाया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक ग्रुप 'मजदूर आंदोलन' के नाम से संचालित किया जा रहा था, जिसमें विभिन्न मजदूर संगठनों और समूहों को जोड़ा गया था. इन समूहों में लगातार मैसेज भेजे जा रहे थे, जिनमें लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा था. जांच में यह भी सामने आया है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में कई भड़काऊ और उत्तेजक पोस्ट शेयर किये गए. इन मैसेज का मकसद भीड़ को उकसाना और विरोध को अधिक आक्रामक बनाना था. कुछ पोस्ट में गलत जानकारी और अफवाहें भी फैलाई गईं, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई.
सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया विरोध प्रदर्शन
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ये अहम सबूत मिले हैं. डिजिटल फॉरेंसिक जांच में इन ग्रुपों की गतिविधियों, संदेशों और एडमिन की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया प्रयास दिखाई देता है. वहीं, पुलिस अब इन ग्रुपों के एडमिन और ऑपरेटर्स की पहचान कर रही है. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय थे. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ मैसेजों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.

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7 थानों में FIR, 300 लोग गिरफ्तार
नोएडा सेक्टर-63 में मारुति सुजुकी के वर्कशॉप में उपद्रवियों ने वहां खड़ी कारों में आग लगा दी, दर्जन भर कारों के शीशे भी तोड़ दिए. सेक्टर-63 के पुलिस थाने पर भी पत्थरबाजी हुई, पुलिस ने भी पत्थर फेंकने वालों को खूब दौड़ाया. सेक्टर-15 के आसपास कमर्शियल सेक्टरों से आए लोगो ने एक्सप्रेस-वे जाम कर दिया. शहर के दूसरे कोने पर सेक्टर-62 में फैक्ट्री कर्मचारियों ने नेशनल हाइवे को भी पूरी तरह जाम करने की कोशिश की, जिससे कई घंटों तक जाम लगा रहा.
पुलिस ने बताया कि 300 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस के मुताबिक, 80 से अधिक जगह पर उपद्रव हुआ है. 42 हज़ार के करीब कर्मचारियों इस प्रदर्शन में शामिल थे. नोएडा के 7 थानों में FIR दर्ज कराई गई है. नोएडा से 300 लोगों को प्रीवेंटिव अरेस्ट कर न्यायिक हिरासत में भेज में दिया गया है. प्रदर्शन में शामिल और कानून को हाथ में लेने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश प्रशासन ने दिये हैं.
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