- सिर्फ अभिनेता नहीं, किसानों के मसीहा भी थे नाना पाटेकर
- 'नाम फाउंडेशन’ की कहानी: कैसे हजारों किसानों का सहारा बने नाना पाटेकर
- देवेंद्र फडणवीस बोले- किसानों और गांवों के लिए नाना का काम हमेशा याद रखा जाएगा
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद जहां देश उनके यादगार अभिनय को श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता और किसानों के लिए किए गए कार्यों की भी व्यापक चर्चा हो रही है. फिल्मों की चमक-दमक से दूर नाना पाटेकर ने महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए ऐसा काम किया, जिसने उन्हें केवल अभिनेता नहीं बल्कि समाजसेवी के रूप में भी स्थापित किया. ‘नाम फाउंडेशन' के जरिए उन्होंने हजारों जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाने का अभियान चलाया, जो आगे चलकर एक जन आंदोलन बन गया.
2015 में हुई ‘नाम फाउंडेशन' की स्थापना
साल 2015 में महाराष्ट्र में लगातार सूखा, जल संकट और किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों के बीच नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने मिलकर ‘नाम फाउंडेशन' की स्थापना की थी. यह पहल केवल एक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की पीड़ा और ग्रामीण संकट के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन के रूप में शुरू हुई. फाउंडेशन का उद्देश्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना, किसानों को जागरूक करना और ग्रामीण विकास को नई दिशा देना था.

नाना पाटेकर और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
Photo Credit: Naam Foundation
किसानों की मदद को बनाया मिशन
नाम फाउंडेशन का मुख्य फोकस किसान आत्महत्या, जल संकट और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गिरते जीवन स्तर जैसी समस्याओं पर रहा. नाना पाटेकर ने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई. इतना ही नहीं, उन्होंने ऐसे परिवारों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस तक भरने की जिम्मेदारी उठाई. मदद पहुंचाने के दौरान वह अक्सर दूरदराज के गांवों में खुद जाते थे. खास बात यह थी कि इन यात्राओं में न तो मीडिया को बुलाया जाता था और न ही प्रचार की कोशिश की जाती थी.
जल संरक्षण पर दिया सबसे ज्यादा जोर
फाउंडेशन ने केवल राहत बांटने तक खुद को सीमित नहीं रखा. जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन को इसके सबसे बड़े मिशनों में शामिल किया गया. ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, भूजल संरक्षण, पुराने नहर तंत्र को पुनर्जीवित करने और अधूरी जल परियोजनाओं को पूरा करने पर काम किया गया. फाउंडेशन का मानना था कि किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि पानी और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

नाम फाउंडेशन द्वारा किया गया कार्य
Photo Credit: Naam Foundation
फिल्मी कमाई भी कर दी समाजसेवा के नाम
नाना पाटेकर की सादगी की चर्चा अक्सर होती रही है. बताया जाता है कि उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों के लिए फिल्मों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा खर्च किया. आलीशान जीवनशैली अपनाने के बजाय उन्होंने साधारण जीवन जीना पसंद किया. महंगी कारों और बड़े बंगले पर पैसा खर्च करने की जगह उन्होंने जरूरतमंद किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद को प्राथमिकता दी.
‘नाम' संगठन से आंदोलन बना
समय के साथ नाम फाउंडेशन केवल एक संस्था नहीं रहा, बल्कि किसानों के हितों के लिए काम करने वाला एक बड़ा सामाजिक आंदोलन बन गया. फाउंडेशन का विजन किसानों की परेशानियों को दूर कर मानव जीवन को सशक्त बनाना और देश के विकास के लिए संसाधनों को मजबूत करना था. वहीं मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचे, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना था. फाउंडेशन की कई परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हुईं और कई योजनाएं लगातार आगे बढ़ाई जाती रहीं.
नेताओं ने भी याद किया सामाजिक योगदान
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जलयुक्त शिवार अभियान को समर्थन दिया और मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर नाम फाउंडेशन के जरिए गांव-गांव में काम किया. फडणवीस ने कहा कि नाना ने किसानों की मदद की, सूखे के समय लोगों का सहारा बने और यदि आज वे हमारे बीच होते तो मौजूदा संकटों में भी लोगों की सहायता के लिए सबसे आगे खड़े दिखाई देते. वहीं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि अभिनय के शिखर पर पहुंचने के बाद भी नाना पाटेकर ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को कभी नहीं भुलाया. नाम फाउंडेशन के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों, सूखा प्रभावित लोगों और किसानों के लिए किया गया उनका कार्य हमेशा प्रेरणा देता रहेगा.
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