मुंबई की सबसे बड़ी प्राइवेट लैब को अगले चार हफ्तों के लिए कोरोनावायरस टेस्ट करने से रोक दिया गया है. इससे देश में कोरोनावायरस के सबसे बड़े हॉटस्पॉट इस शहर की टेस्ट करने की रफ्तार के धीमे होने की संभावना है. इस लैब प्रतिबंध लगाने के का यह आदेश बृहनमुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा दिया गया है. इस लैब पर टेस्ट रिपोर्ट देने में देरी करने के आरोप है. रिपोर्ट में देरी से संपर्क ट्रेसिंग में मुश्किलें आती हैं. बीएमसी ने अपने आदेश में कहा कि इससे इलाज में देरी हो सकती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है.
मेट्रोपोलिस लैब (Metropolis Lab) ने रिपोर्ट में देरी को स्वीकार किया है. लैब का कहना है कि देरी का एक कारण यह भी है कि उनके कर्मचारी खुद संक्रमण की चपेट में आ गए हैं. लैब ने यह भी कहा कि विलंबित रिपोर्टों का प्रतिशत बहुत कम है.
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एक और निजी लैब थायरोकेयर (Thyrocare) को ठाणे में नगर निगम द्वारा झूठी पॉजिटिव रिपोर्ट देने के लिए बैन किया गया था. लापरवाही के लिए वसई विरार नगर निगम द्वारा लैब को नोटिस जारी किया गया है. इससे पहले भी, मुंबई में थायरोकेयर पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन अब परीक्षण फिर से शुरू करने की अनुमति है. 54,000 से अधिक मामलों के साथ, मुंबई वर्तमान में देश में कोरोनोवायरस मामलों की अधिकतम संख्या वाला शहर है, जहां व्यापक परीक्षण और त्वरित परिणाम महत्वपूर्ण हैं.
दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा में भी तीन प्राइवेट लैब पर कार्रवाई किए जाने की संभावना है. क्योंकि इन लैब्स की गलत रिपोर्ट से 35 मरीजों ने तीन दिन तक कोरोना सुविधाएं ली. इन लोगों की प्राथमिक रिपोर्ट पॉजिटिव आई लेकिन दूसरे सेट में पता चला कि इन्हें कोरोनावायरस नहीं है. जिसके लिए तकनीकी रूप से 'गलत पॉजिटिव (false positives)'कहा
जाता है.
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