- दिल्ली की अपेक्षा इस बार अक्टूबर के महीने में मुंबई की हवा ज्यादा खराब है.
- समंदर किनारे बसी मायानगरी में इस बार पलूशन तेजी से बढ़ता जा रहा है.
- 24 अक्टूबर के दिन मुंबई का AQI 322 था, जबकि दिल्ली का AQI 176 था.
अक्टूबर के महीने के आखिरी हफ्ते में मौसम तेजी से बदल रहा है. जिससे मुंबई, दिल्ली समेत बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है. लेकिन इस बार एक बड़ा परिवर्तन दिख रहा है. अक्टूबर के महीने में दिल्ली की हवा इस बार अब तक सबसे अच्छी मापी गई है. जबकि इसके उलट मुंबई में हवा बेहद खराब हो रही है. मुंबई का AQI फिलहाल 322 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. जबकि दिल्ली में फिलहाल AQI अभी 167 पर चल रहा है. जो अक्टूबर में हवा का स्तर सबसे बेहतर रहा है. सड़क की धूल, ट्रैफिक और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण के कारण मुंबई की हवा और खराब हो गई है, जिससे शहर में स्मॉग छाया हुआ है.
मुंबई में बिगड़ रही हवा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर के इस सप्ताहांत में मुंबई का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 322 तक पहुंच गया है. इसमें सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और निर्माण कार्य सभी का योगदान है. हालांकि प्रशासन ने नए उपायों की घोषणा की है, लेकिन इन उपायों की निगरानी उन्हें लागू करने के तरीकों और शहर की हवा को प्रदूषित करने वाले मुख्य स्रोतों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं. मुंबई समु्द्र के किनारे बसा हुआ है, जिसे लंबे समय से प्रदूषण को दूर करने के लिए एक फायदे के रूप में देखा जाता रहा है. लेकिन अब जब शहर के आसमान पर धुंध छा गई है और अलग-अलग इलाकों में हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, तो यह साफ है कि शहर के सामने खड़ी समस्या सिर्फ निर्माण कार्यों में आई तेजी तक सीमित नहीं है.
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दिल्ली-मुंबई में हवा का स्तर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 24 अक्टूबर को मुंबई का AQI 322 तक पहुंच गया था, जो बहुत खराब की श्रेणी में आता है. जबकि इसी दिन दिल्ली का AQI 176 दर्ज किया गया था. दोनों शहरों के बीच का यह अंतर काफी चौंकाने वाला था, लेकिन सिर्फ एक दिन के आंकड़ों से यह तय नहीं किया जा सकता कि लंबे समय में किस शहर की हवा ज्यादा खराब है. मुंबई में हाल ही में बढ़ा प्रदूषण असल में वाहनों से निकलने वाले धुएं, मौसम की स्थितियों और प्रदूषण नियंत्रण में मौजूद कमियों के मिले-जुले असर को दिखाता है.
क्यों बढ़ा मुंबई में प्रदूषण
मुंबई में बढ़े हुए प्रदूषण की कई वजह हैं. मुंबई में PM10 प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में परिवहन, हवा से उड़ने वाली सड़क की धूल और औद्योगिक गतिविधियां शामिल हैं. अध्ययन के मुताबिक इनमें इनका योगदान 19.6 प्रतिशत, 19.4 प्रतिशत और 18.9 प्रतिशत है. यह अध्ययन 2020 के डेटा पर आधारित था. इसलिए, इन आंकड़ों को किसी एक खास दिन के प्रदूषण के सटीक माप के बजाय, प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों के आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए. मुंबई जैसे शहर में जहां बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का काम चल रहा है और भारी ट्रैफिक रहता है, वहां सड़क की धूल एक बड़ी समस्या है. वाहनों के गुजरने से सड़कों पर जमा धूल, निर्माण सामग्री के कण और मलबा फिर से हवा में उड़ने लगते हैं. इसके अलावा, ट्रैफिक जाम की समस्या भी स्थिति को और बिगाड़ देती है, जिससे व्यस्त सड़कों और चौराहों के आसपास वाहनों से निकलने वाला धुआं जमा हो जाता है.
मुंबई तटीय इलाके में बसा है, लेकिन जब हवा धीमी होती है. यहां प्रदूषण जमा होने से नहीं रुक पाता. मौसम की स्थिति के कारण प्रदूषक तत्व हवा में ठीक से फैल नहीं पाते, जबकि नमी और हवा में मौजूद समुद्री नमक के कणों की वजह से धुंध दिखाई देने लगती है. BMC ने पाया है कि समुद्र से आने वाला सोडियम क्लोराइड (यानी साधारण नमक) भी हवा में धुंध पैदा करने का एक कारण है. हालांकि सिर्फ समुद्री नमक से ही शहर की बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को नहीं समझाया जा सकता. वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों से होने वाला प्रदूषण और हवा में मौजूद बारीक कण अभी भी बड़ी चिंता का विषय हैं.
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