
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने की चुनौती काफी बड़ी है। इसका वास्ता यहां हर साल बढ़ती गाड़ियों से भी है। सोमवार को एनजीटी ने कहा कि गाड़ियों के लिए नियम और सख्त होने चाहिए और दिल्ली सरकार ने बताया कि गाड़ियों की तादाद हर साल बढ़ती जा रही है।
हर रात दिल्ली की सड़कों पर धूल और धुएं का एक गुबार दाखिल होता है। दूसरे राज्यों से प्रतिदिन आने वाले करीब 80,000 ट्रक जिन तेरह नाकों से शहर में दाखिल होते हैं, उनमें छह में प्रदूषण जांच का कोई इंतजाम नहीं है।
ये बात दिल्ली सरकार ने एनजीटी के सामने मानी है। इधर एनजीटी ने अब डीजल वाली गाड़ियों को लेकर सख्ती और बढ़ा दी है। एनजीटी ने कहा कि सिर्फ धुएं से प्रदूषण को मापना काफा नहीं। गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण पर कायदे और सख्त होने चाहिए।
दिल्ली और केंद्र के प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय इसको लेकर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दें और दिल्ली पुलिस बताए कि जिन ट्रकों को दिल्ली नहीं आना है, उनके लिए दूसरे रास्ते निकालने का क्या हो रहा है। इस मसले पर अब अगली सुनवाई दो दिन बाद होनी है।
हर रात दिल्ली की सड़कों पर धूल और धुएं का एक गुबार दाखिल होता है। दूसरे राज्यों से प्रतिदिन आने वाले करीब 80,000 ट्रक जिन तेरह नाकों से शहर में दाखिल होते हैं, उनमें छह में प्रदूषण जांच का कोई इंतजाम नहीं है।
ये बात दिल्ली सरकार ने एनजीटी के सामने मानी है। इधर एनजीटी ने अब डीजल वाली गाड़ियों को लेकर सख्ती और बढ़ा दी है। एनजीटी ने कहा कि सिर्फ धुएं से प्रदूषण को मापना काफा नहीं। गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण पर कायदे और सख्त होने चाहिए।
दिल्ली और केंद्र के प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय इसको लेकर अपनी स्टेटस रिपोर्ट दें और दिल्ली पुलिस बताए कि जिन ट्रकों को दिल्ली नहीं आना है, उनके लिए दूसरे रास्ते निकालने का क्या हो रहा है। इस मसले पर अब अगली सुनवाई दो दिन बाद होनी है।
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