विज्ञापन

हिमाचल के चीफ सेक्रेटरी ने 25 करोड़ की जमीन 1.38 करोड़ में खरीदी! FIR दर्ज होते ही CM बोले- 'कार्रवाई होगी'

Bureaucratic Infighting in Himachal: हिमाचल के सबसे बड़े अफसर पर 25 करोड़ की जमीन सस्ते में खरीदने का आरोप लगा है. इस मामले में FIR दर्ज होते ही चीफ सेक्रेटरी ने अपने ही साथियों पर ठीकरा फोड़ा है. क्या है पूरा सच और CM सुक्खू ने क्या कहा? पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी.

हिमाचल के चीफ सेक्रेटरी ने 25 करोड़ की जमीन 1.38 करोड़ में खरीदी! FIR दर्ज होते ही CM बोले- 'कार्रवाई होगी'
हिमाचल प्रदेश चीफ सेक्रेटरी संजय गुप्ता जमीन घोटाला मामला: क्या है चेस्टर हिल प्रोजेक्ट विवाद?
Facebook@SukhvinderSinghSukhu

Shimla News: हिमाचल प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी (Himachal Pradesh Bureaucracy) में इस वक्त जबरदस्त घमासान मचा है. प्रदेश के सबसे बड़े अफसर, यानी चीफ सेक्रेटरी संजय गुप्ता (CS Sanjay Gupta) पर जमीन घोटाले के गंभीर आरोप लगे हैं. मामला तब गरमाया जब छोटा शिमला थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई. आरोप है कि पंजाब के खरड़ में जिस जमीन की कीमत करीब 25 करोड़ रुपये है, उसे चीफ सेक्रेटरी ने अपने कागजों में सिर्फ 1.38 करोड़ रुपये का दिखाया है. जैसे ही यह खबर फैली, हड़कंप मच गया और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhvinder Singh Sukhu) को भी सफाई देनी पड़ी कि अगर कुछ गड़बड़ हुई तो कार्रवाई जरूर होगी.

सीधे अपने ही साथियों पर फोड़ा ठीकरा

आमतौर पर बड़े अफसर विवादों पर चुप रहते हैं, लेकिन संजय गुप्ता खुद मीडिया के सामने आए और उन्होंने एक बड़ा बयान दे दिया. उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया और सीधे-सीधे अपने ही विभाग के दो पूर्व चीफ सेक्रेटरी- आर.डी. धीमान और प्रबोध सक्सेना पर साजिश रचने का आरोप लगा दिया. संजय गुप्ता का कहना है कि उन्होंने बिजली बोर्ड में रहते हुए सरकार को फायदा पहुंचाया और इन दोनों अफसरों की शिकायत की थी, बस उसी खुन्नस में उन्हें फंसाने के लिए यह खेल रचा जा रहा है.

साजिश या सच? एक्सटेंशन का पेच

चीफ सेक्रेटरी ने दावा किया कि यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि मुख्यमंत्री उन्हें सर्विस में एक्सटेंशन (कार्यकाल बढ़ाना) न दें. उन्होंने सफाई दी कि सोलन के जिस चेस्टर हिल प्रोजेक्ट (Chester Hill Project) में गड़बड़ी की बात हो रही है, उस वक्त वो पशुपालन विभाग में थे. गुप्ता ने दो टूक कहा, 'मैंने जमीन अपने पैसे से खरीदी है, सरकार से परमिशन ली है और मेरे पास सारे कागज मौजूद हैं.' उन्होंने साफ किया कि उस प्रोजेक्ट को पूर्व अफसर श्रीकांत बाल्दी ने रेरा प्रमुख रहते हुए पास किया था, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है.

विपक्ष और माकपा का हल्ला बोल

इस मामले को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) और वकील विनय शर्मा ने मोर्चा खोल दिया है. पूर्व विधायक राकेश सिंघा और संजय चौहान का कहना है कि हिमाचल में भू-माफिया और बड़े अफसर मिलकर खेल कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस घोटाले की सही जांच नहीं हुई और दोषियों पर एक्शन नहीं लिया गया, तो वे सचिवालय का घेराव करेंगे. उनका आरोप है कि अधिकारियों के संरक्षण में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है.

ब्यूरोक्रेट्स की लड़ाई में क्या करेंगे CM?

जब इस पूरे बवाल पर मुख्यमंत्री सुक्खू से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इसकी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन नियमों के खिलाफ कुछ भी हुआ तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा. अब हिमाचल में अफसरों की यह आपसी लड़ाई क्या मोड़ लेती है, यह देखना दिलचस्प होगा. एक तरफ 25 करोड़ की जमीन को 1.38 करोड़ में खरीदने का आरोप है, तो दूसरी तरफ रसूखदार अफसरों के बीच की जंग. फिलहाल गेंद अब जांच एजेंसियों के पाले में है.

ये भी पढ़ें:- शिमला की 'सील' सड़कों पर एंट्री के बदलेंगे नियम, परमिट से लेकर जुर्माने तक सब कुछ होगा महंगा

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com