नई दिल्ली:
NEET की परीक्षा को लेकर सियासत तेज़ हो गई है। राजनीतिक दल अपनी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर परीक्षा पर सवाल उठा रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार सभी दलों की एक बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। कई सांसद चाहते हैं कि अगले साल से नीट के तहत परीक्षा आयोजित की जाए। बता दें कि नीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया हुआ है कि सभी राज्यों की नीट के तहत परीक्षा होगी। नीट-1 की परीक्षा एक मई को हो चुकी है, वहीं नीट-2 की परीक्षा 24 जुलाई को होगी।
इस मामले पर सांसद हनुमंथ राव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के साथ नाइंसाफ़ी नहीं होनी चाहिए सिर्फ़ इसलिए की उन्होंने मातृभाषा में पढ़ाई की है। एनसीपी का कहना है कि जेएनयू में तो अभी भी क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा होती है, वहीं दूसरी तरफ़ समाजवादी पार्टी का कहना है क्षेत्रीय भाषा में मेडिकल की पढ़ाई से सभी को फ़ायदा होगा।
भविष्य अधर में लटका
बुधवार को इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि इन छात्रों ने दो-तीन साल से तैयारी की थी और अब अचानक उनसे परीक्षा के ठीक पहले NEET देने को कहा जा रहा है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में काफी संख्या में छात्रों ने स्थानीय भाषाओं में तैयारी की थी लेकिन अब उनसे अंग्रेजी में परीक्षा देने को कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर NEET आयोजित करना भी है तो चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जाए, अचानक ऐसा करना छात्रों के हितों के खिलाफ है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की ओर से कुछ पहल की जाए और सरकार अदालत को छात्रों की समस्याओं से अवगत कराये।
इस मामले पर सांसद हनुमंथ राव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के साथ नाइंसाफ़ी नहीं होनी चाहिए सिर्फ़ इसलिए की उन्होंने मातृभाषा में पढ़ाई की है। एनसीपी का कहना है कि जेएनयू में तो अभी भी क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा होती है, वहीं दूसरी तरफ़ समाजवादी पार्टी का कहना है क्षेत्रीय भाषा में मेडिकल की पढ़ाई से सभी को फ़ायदा होगा।
भविष्य अधर में लटका
बुधवार को इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के इस आदेश के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि इन छात्रों ने दो-तीन साल से तैयारी की थी और अब अचानक उनसे परीक्षा के ठीक पहले NEET देने को कहा जा रहा है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में काफी संख्या में छात्रों ने स्थानीय भाषाओं में तैयारी की थी लेकिन अब उनसे अंग्रेजी में परीक्षा देने को कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर NEET आयोजित करना भी है तो चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जाए, अचानक ऐसा करना छात्रों के हितों के खिलाफ है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार की ओर से कुछ पहल की जाए और सरकार अदालत को छात्रों की समस्याओं से अवगत कराये।
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