लीला इब्राहिम गूगल डीपमाइंड की 'चीफ एआई रेडिनेस ऑफिसर' हैं. वह इन दिनों भारत की यात्रा पर हैं. इस दौरान उन्होंने एनडीटीवी के सीईओ राहुल कंवल से बातचीत की. उन्होंने कहा कि भारत में जो काम हो रहा है, उससे न केवल भारत को फायदा मिल रहा है, बल्कि उन्हें कई ऐसी चीजें सीखने को मिली हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया के दूसरे देशों में भी किया जा सकता है. इसके लिए उन्होंने भारत के किसानों के साथ काम करने के बाद विकसित की गई तकनीक का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि इस नई तकनीक को अब तक दुनिया के 11 देशों तक पहुंचाया गया है.
गूगल डीपमाइंड की 'चीफ एआई रेडिनेस ऑफिसर' इब्राहिम से पूछा गया था कि इस समय भारत दुनिया में अल्फाबेट (गूगल की पैरेंट कंपनी) की तकनीकों का इस्तेमाल करने वाला चौथा सबसे बड़ा देश है. ऐसे में जब आप भारत की तुलना उन दूसरे देशों से करती हैं, जहां आप गई हैं, तो एक देश के तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने के लिए भारत कितना तैयार नजर आता है. आपकी तैयारी के पैमाने पर भारत किस पायदान पर है.
कैसी है भारत में तकनीकी की तरक्की का राह
इस सवाल के जवाब में लीला इब्राहिम ने कहा कि वो अपने करियर के करीब 30 साल से भारत आती रही हैं. इस दौरान भारत में तकनीक के क्षेत्र में हुई तरक्की को देखना एक शानदार अनुभव है. उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगता है कि यहां की कंपनियां और आम लोग भारत की विविधता और संस्कृति का कितना ध्यान रखते हैं. इसमें अलग-अलग भाषाओं के लिए तकनीक तैयार करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि हर कोई उसका इस्तेमाल कर सके. इसके साथ ही, कृषि जैसे क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर भी तकनीक विकास पर जोर दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अपनी भारत यात्रा के दौरान मैं एक और बात से काफी प्रभावित हुई हूं, वह यह है कि यहां जो काम हो रहा है, उससे न सिर्फ भारत को फायदा मिल रहा है, बल्कि हमें कई ऐसी चीजें सीखने को भी मिल रही हैं, जिनका इस्तेमाल दुनिया के दूसरे हिस्सों में किया जा सकता है. हम यह भी सोच रहे हैं कि भारत में किए जा रहे इन प्रयोगों का दुनिया भर पर क्या असर हो सकता है.उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कृषि के क्षेत्र में हमारे कुछ कार्यक्रम भारत के करीब छह लाख किसानों के साथ काम कर रहे हैं. इस दौरान विकसित की गई तकनीक को अब दुनिया के 11 दूसरे देशों तक पहुंचाया जा चुका है. हमारी योजना इसे और भी ज्यादा देशों तक ले जाने की है.
दुनिया में पहुंचेगी भारत में मिली सीख
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि भारत की विविधता, तकनीक के प्रति लोगों की सोच और आम लोगों की असल समस्याओं को हल करने पर ध्यान देने की वजह से ही यहां तेजी से प्रगति हो रही है.उन्होंने कहा कि अब हमें यह भी सोचना है कि भारत को फायदा पहुंचाने और यहां के लोगों के साथ मिलकर काम करने के अलावा, इस अनुभव का इस्तेमाल पूरी दुनिया के लिए कैसे किया जा सकता है. भारत में किए जा रहे काम को हम दुनिया के दूसरे देशों के लिए एक मॉडल या उदाहरण के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये भी पढ़ें: 'जुल्म की इंतिहा हुई'...अधिकारी पर बरसे शिवराज सिंह चौहान, CM मोहन से करेंगे बात, किस बात से हैं नाराज?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं