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यूसुफ पठान को वडोदरा में मिल गया प्लॉट, नगर निकाय की मंजूरी के बाद अंतिम बाधा भी खत्म

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन यूसुफ पठान को मुफ्त में दी जा रही है.

यूसुफ पठान को वडोदरा में मिल गया प्लॉट, नगर निकाय की मंजूरी के बाद अंतिम बाधा भी खत्म
वडोदरा:

गुजरात में वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने कांग्रेस के विरोध के बीच पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर मुफ्त में देने और बाकी जमीन रियायती दर पर आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. बीजेपी शासित नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष वर्षा व्यास ने बताया कि गुजरात सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को मंजूरी दे दी गई है. उन्होंने बताया कि शेष 478 वर्ग मीटर जमीन वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण की मूल्यांकन समिति द्वारा निर्धारित दर के 55 प्रतिशत पर दी जाएगी, यानी इसमें 45 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

प्रस्ताव को अगले महीने नगर निगम के सामान्य बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा. यूसुफ पठान 2012 से वडोदरा के टांडलजा इलाके में अपने परिवार के घर के पास स्थित इस भूखंड को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं. 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नगर निगम ने उन्हें कथित अतिक्रमण हटाने और जमीन खाली करने का नोटिस दिया था.

गुजरात उच्च न्यायालय ने भूखंड आवंटित करने के अनुरोध को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा था. पठान ने बाद में अपील वापस ले ली थी. इस जमीन की कीमत 20.53 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया. पार्टी के शहर अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने आरोप लगाया कि करीब 15 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पठान को मुफ्त में दी जा रही है.

इस विवादित प्लॉट के पास ही पठान परिवार का घर स्थित है. गौरतलब है कि यूसुफ हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को छोड़कर नेशनलिस्ट सिटजिन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं.

साल 2012 में यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) से बिना नीलामी के एक प्लॉट 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी. अपने आवेदन में उन्होंने पूर्व क्रिकेटर होने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था. वीएमसी ने इस प्रस्ताव पर सहमति भी जता दी थी और उस समय प्लॉट की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार थे. हाालंकि, बिना नीलामी के जमीन आवंटित करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी थी. बाद में 2014 में गुजरात के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. इसके बावजूद नगर निगम का आरोप था कि प्रस्ताव रद्द होने के बाद भी पठान ने जमीन के चारों ओर घेराबंदी कर ली थी.

यूसुफ ने हाई कोर्ट से बिना शर्त अपनी याचिका वापस ले ली थी

इसके बाद 2024 में नगर निगम ने कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पठान को नोटिस जारी किया. इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें जमीन का आवंटन खारिज किया गया था. वहीं, जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि जब न तो जमीन का आवंटन हुआ और न ही उसके लिए कोई भुगतान या आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं, तो किसी व्यक्ति का उस जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है. इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ ने हाई कोर्ट से बिना शर्त अपनी याचिका वापस ले ली थी.

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