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यह महाराष्ट्र है, मराठी सीखनी ही होगी; टैक्सी ड्राइवरों को फडणवीस के मंत्री की खुली चेतावनी

प्रताप सरनाइक ने कहा कि यह मराठी अस्मिता का सवाल है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता. हम मराठी भाषा से प्यार करते हैं.

यह महाराष्ट्र है, मराठी सीखनी ही होगी; टैक्सी ड्राइवरों को फडणवीस के मंत्री की खुली चेतावनी
मुंबई:

महाराष्ट्र में अब टैक्सी चालकों के लिए मराठी में ही बात करना अनिवार्य कर दिया गया है. एक वर्ग इस फैसले को गलत मान रहा है और उदारता की अपील की जा रही है. इस बीच महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक का कहना है कि कोई छूट नहीं दी जाएगी. उनसे यह सवाल किया गया था कि यदि ऐसी ढील नहीं दी गई तो फिर मुंबई का कॉस्मोपोलटिन कल्चर प्रभावित होगा. इसके जवाब में सरनाइक ने कहा कि कुछ और बिलकुल नहीं चलेगा. महाराष्ट्र में मराठी तो बोलनी ही होगी. उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा के बोलने वाले लोग हों, उन्हें मराठी ही बोलनी होगी और नहीं आती है तो फिर सीखना होगा. यह पूछा गया कि मुंबई में तो कई भाषाओं के लोग रहते हैं.

ऐसे में क्या मुंबई में उन्हें दूसरी भाषाओं में करने की छूट दी जाए. उन्हें मराठी बोलने या सीखने के लिए मजबूर न किया जाए. इस पर सरनाइक ने कहा, बिलकुल नहीं चलेगा. सरनाइक ने कहा कि यह महाराष्ट्र है और मुंबई इससे बाहर नहीं है. उन्होंने कहा कि शहर की भाषायी पहचान महाराष्ट्र से अलग नहीं है. सरनाइक ने कहा कि भाषा को लेकर यह नीति सालों से रही है, लेकिन इसे लागू अब किया जा रहा है. दरअसल इस फैसले को लेकर यह कहा जा रहा है कि इससे पर्वतीय इलाकों में रहने वालों और आदिवासी तबके के लोगों को ज्यादा दिक्कत होगी. 

आमतौर पर मुंबई में टैक्सी वाले हिंदी में बात करते हैं या फिर कोई अन्य गैर-मराठी भाषा बोलते हैं. ऐसे में नया आदेश उनकी मुश्किल बढ़ाने वाला है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लोग बेसिक मराठी सीखें और फिर बोलना शुरू करें. सरनाइक ने कहा कि यह मराठी अस्मिता का सवाल है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता. हम मराठी भाषा से प्यार करते हैं. फडणवीस सरकार के मंत्री ने कहा कि हम किसी की कमाई को चोट नहीं पहुंचाना चाहते. हमारी इतनी ही मांग है कि वे मराठी भाषा सीख लें. उन्होंने कहा कि हम मुंबई में सबका स्वागत करते हैं, लेकिन उन्हें मराठी भाषा का सम्मान करना होगा.   

प्रताप सरनाइक ने कहा कि हमने मराठी सिखाने के लिए 1600 अध्यापक नियुक्त किए हैं और 1600 स्थानों पर पढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि हम ऐसे कदम इसलिए उठा रहे हैं ताकि सड़कों पर विवाद न हो सके. उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र है और यहां ढिलाई नहीं चलेगी. सरनाइक ने कहा कि मुंबई के लिए 106 लोगों ने जान दी है. मुंबई महाराष्ट्र से बाहर नहीं है और यहां की संस्कृति मुंबई पर भी लागू होती है. 

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