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This Article is From Feb 04, 2013

सेंसर बोर्ड की शक्तियों की समीक्षा करेगी समिति

नई दिल्ली: कमल हासन की फिल्म ‘विश्वरूपम’ को लेकर हुए विवाद के बाद केंद्र ने सेंसर बोर्ड के अधिकारों की समीक्षा और ‘वर्तमान दौर में प्रमाणन की जरूरतों’ के अनुरूप इसे सक्षम बनाने के लिए उपाय सुझाने के लिए एक समिति का गठन किया।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मुकुल मुदगल की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय समिति फिल्मों के प्रदर्शन को मंजूरी देने में राज्य सरकारों के अधिकारों के परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार की भूमिका की भी जांच करेगी।

संघ सूची की 60वीं प्रविष्टि के तहत केंद्र को प्रदर्शन के लिए फिल्मों को मंजूरी देने का अधिकार है जबकि राज्य सूची की 33वीं प्रविष्टि के तहत सिनेमाघरों और नाटक संबंधी कार्यक्रमों पर राज्य सरकारों को अधिकार मिला हुआ है।

‘विश्वरूपम’ को लेकर चल रहे विवाद के दौरान कहा गया था कि फिल्म को पहले से ही प्रदर्शन के लिए सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिली हुई है। तमिलनाडु सरकार ने विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल समिति के अध्यक्ष हैं जबकि इसके सदस्यों में फिल्म प्रमाणन अपीली न्यायाधिकरण (एफसीएटी) के अध्यक्ष ललित भसीन, अभिनेत्री शर्मिला टैगोर, गीतकार जावेद अख्तर, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की अध्यक्ष लीला सैमसन शामिल हैं।

फिल्म फेडेरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एल सुरेश, वकील रमीजा हकीम और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव राघवेंद्र सिंह समिति के दूसरे सदस्यों में शामिल हैं। समिति दो महीनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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Censor Board, सेंसर बोर्ड, शक्तियों की समीक्षा, समिति
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