बहुजन समाज पार्टी अब सिर्फ अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरणों के भरोसे आगे बढ़ने के बजाय नई पीढ़ी को संगठन और राजनीति के केंद्र में लाने की तैयारी में है. BSP की रणनीति में Gen-Z और युवा कार्यकर्ताओं को बड़ी भूमिका देने पर विचार हो रहा है और पार्टी में युवाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत तक करने की बात सामने आई है.
इसी के साथ BSP प्रमुख मायावती ने पार्टी में अपने परिवार की अगली पीढ़ी को लेकर भी अपना रुख साफ कर दिया है. मायावती ने कहा है कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को भविष्य में पार्टी में कोई पद नहीं मिलेगा. इनमें उनके निष्कासित भतीजे और कभी मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर देखे गए आकाश आनंद भी शामिल हैं. मायावती ने इसे अपना 'अंतिम निर्णय और शपथ' बताया है.
Gen-Z के सहारे अंबेडकरवादी राजनीति को नई जमीन देने की कोशिश
इसका मकसद सिर्फ संगठन में नए चेहरों को शामिल करना नहीं है. BSP की कोशिश पहली बार वोट देने वाले युवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नई पीढ़ी के बीच अंबेडकरवादी राजनीति को नए तरीके से पहुंचाने की है. यानी पार्टी उन मतदाताओं तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाना चाहती है, जिनका बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए राजनीतिक मुद्दों को समझता है.
भतीजों को लेकर क्या बोलीं मायावती?
युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की चर्चा के बीच मायावती ने अपने परिवार के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी बड़ा फैसला सुनाया है. उन्होंने साफ कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को आगे चलकर BSP में कोई पार्टी पद नहीं दिया जाएगा.
इस फैसले का सीधा असर आकाश आनंद पर भी पड़ता है. आकाश आनंद को एक समय मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. हालांकि उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है. अब मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे के लिए पार्टी संगठन में पद की गुंजाइश नहीं होगी.
मायावती ने अपने इस फैसले को 'अंतिम निर्णय' बताया है. यानी पार्टी के भीतर परिवार की अगली पीढ़ी में पुरुष उत्तराधिकारी को लेकर चल रही संभावनाओं पर उन्होंने अपनी तरफ से स्पष्टता देने की कोशिश की है.
भतीजों के बाद भतीजी दीपिका आनंद
यहीं पर आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद का नाम महत्वपूर्ण हो जाता है. मायावती ने कहा है कि आनंद कुमार राजनीतिक मदद के लिए अपनी बेटी दीपिका आनंद से सहायता ले सकते हैं.

हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि दीपिका आनंद को BSP का अगला उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया है. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मायावती ने अपने भाई के बेटों के लिए पार्टी पद की संभावना को खारिज किया है और राजनीतिक सहायता के संदर्भ में उनकी बेटी दीपिका आनंद का नाम लिया है.
पुरानी सोशल इंजीनियरिंग से आगे बढ़ने की कोशिश?
BSP की राजनीति को लंबे समय से उसके पारंपरिक सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जाता रहा है. लेकिन अब पार्टी के सामने नई चुनौती युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की है. यही वजह है कि Gen-Z को संगठन में ज्यादा हिस्सेदारी देने की रणनीति आने वाले समय में BSP के लिए अहम हो सकती है.

मायावती के फैसले से क्या संकेत मिलता है?
मायावती के ताजा फैसले में दो बातें एक साथ दिखाई देती हैं. पहली, पार्टी में परिवार के पुरुष उत्तराधिकार को लेकर उन्होंने अपना रुख साफ कर दिया है. दूसरी, BSP के भविष्य में युवाओं के लिए ज्यादा जगह बनाने की तैयारी है.
आकाश आनंद समेत आनंद कुमार के बेटों को पार्टी पद से दूर रखने का फैसला जहां परिवार के भीतर राजनीतिक उत्तराधिकार की संभावनाओं को सीमित करता है, वहीं दीपिका आनंद का नाम सामने आना एक अलग संकेत देता है. दीपिका अभी कानून की छात्रा हैं और उन्हें Gen-Z चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है.
फिलहाल BSP की व्यापक रणनीति का केंद्र युवा भागीदारी बढ़ाना है. पार्टी युवाओं को संगठन और चुनावी राजनीति में अधिक जगह देकर पहली बार वोट देने वालों और डिजिटल रूप से सक्रिय नागरिकों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है.
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