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This Article is From May 04, 2015

भारत में शेरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद, गीर में गिनती शुरू

भारत में शेरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद, गीर में गिनती शुरू
फाइल फोटो
अहमदाबाद: हाल में गुजरात के गीर के जंगलों में बब्बर शेरों की गिनती का काम चल रहा है। सभी को उम्मीद है कि इस बार शेरों की संख्या में काफी इजाफा होगा। इस उम्मीद के पीछे वजह भी है, पिछली बार गिनती सिर्फ 10,000 वर्ग किलोमीटर इलाके में हुई थी, लेकिन इस बार गिनती का इलाका बढ़कर 22,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है। आखिर पिछले सालों में बब्बर शेर गीर के जंगलों से निकलकर बहुत बड़े इलाके में फैल गए हैं।

कोई कहता है कि शेर नए इलाकों में जा रहे हैं, लेकिन पर्यावरण और वाइल्ड लाइफ को जानने वाले कहते हैं कि शेर अपनी खोइ हुई जमीन वापस ले रहे हैं। आखिर बहुत समय पहले वे पूरे गुजरात में पाए जाते रहे होंगे, लेकिन समय के साथ उनका इलाका सिमटकर सिर्फ गीर के जंगलों का 1400 वर्ग किलोमीटर का इलाका रह गया था।

शेरों की जनगणना हर 5 साल में कि जाती रही है। पिछली बार तक शेरों के पांव के निशान वगैरह और दिखे हुए शेरों की गिनती से अंतिम आंकड़ा तय किया जाता था, लेकिन अब ये जनगणना का काम भी बेहद हाइटेक हो गया है। गीर जंगल के इलाके के मुख्य वन पर्यवेक्षक संदीप कुमार का कहना है कि अब जीपीएस, डिजीटल कैमरों का उपयोग हो रहा है। शेरों के हर ग्रुप का अध्ययन किया जाएगा कि एक ग्रुप में कितने शेर हैं, उनका इलाका क्या है और जो सीधे देखे गए हैं उन्हीं शेरों की गिनती की जाएगी। पिछली बार की तरह पैरों के निशान जैसे परोक्ष सबूतों को गिनती में नहीं लिया जाएगा।

2000 से ज्यादा लोग इस गिनती में जुड़े हुए हैं और 22,000 वर्ग किलोमीटर में आठ जिलों में ये जनगणना चल रही है। गणना करने वाले लोगों में भांति-भांति के लोग शामिल हुए हैं। वन विभाग के कर्मचारियों के अलावा, वाइल्ड लाइफ में दिलचस्पी रखने वाले डॉक्टर्स छात्र जैसे लोग भी इस टीम में शामिल हैं।

शेरों की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। ये बब्बर शेर जिन्हें एशियाटिक लायन कहा जाता है वे पूरी दुनिया में सिर्फ गुजरात के जुनागढ़ के गीर के जंगलों में ही पाये जाते हैं। एक वक्त पर वे विनाश की कगार पर पहुंच गए थे। कहते हैं आजादी से पहले सिर्फ 11 शेर ही बचे थे, लेकिन फिर जुनागढ़ के नवाब ने शेरों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया और उनकी संख्या बढ़ाने की मुहिम शुरू की थी।

फिर आजादी से बाद 1963 में पहली बार इन बब्बर शेरों की जनगणना की गई। उस वक्त इनकी संख्या 285 पाई गई थी। फिर तो सभी सरकारों ने इसके लिए विशेष कदम उठाए और शेरों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा। अंतिम जनगणना 2010 में की गई थी, उस वक्त शेरों की संख्या 411 पाई गई थी। इनमें 97 नर, 162 मादा और 152 शावक शेर थे। नई गिनती के आंकड़े इस सप्ताह के अंत तक सामने आने की उम्मीद है और सभी को उम्मीद है कि इस बार आंकड़ा पिछली बार से काफी ज्यादा होगा।

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