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This Article is From Jan 25, 2017

उत्तर प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड चुनाव नहीं लड़ेगी

उत्तर प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड चुनाव नहीं लड़ेगी
बिहार के सीएम नीतीश कुमार...
पटना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता दल यूनाइटेड उम्मीदवार खड़ा नहीं करेगी. यह फैसला पिछले दो दिनों के दौरान पार्टी की कोर कमेटी की बैठक और मंगलवार शाम उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया था, लेकिन बुधवार को इसकी विधिवत घोषणा पार्टी के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने पटना में एक संवाददाता सम्मलेन में की. त्यागी ने कहा कि पार्टी का मानना है कि सांप्रदायिक शक्तियों को पराजित करने के लिए और धर्मनिरपेक्ष वोट में और ज्यादा विभाजन न हो इसलिए पार्टी इस बार चुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन पार्टी ने बिहार की तर्ज पर महागठबंधन न बनने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराया और इसके लिए पार्टी को न केवल आश्चर्य हुआ बल्कि पीड़ा है कि बीजेपी के खिलाफ गठबंधन को व्यापक बनाने में ये दोनों दल नाकाम रहे.

पार्टी के इस वक्तव्य से साफ है कि बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने में अपनी उपेक्षा से पार्टी खुश नहीं है, लेकिन जानकारों की मानें तो जब बैठकों का दौर चल रहा था तब नीतीश कुमार की स्पष्ट राय थी कि समाजवादी पार्टी की जैसी भूमिका बिहार चुनावों में रही, उस तरह के अंदाज से परहेज करेगी. निश्चित रूप से जनता दल यूनाइटेड का मानना है कि अगर बीजेपी को वापस सत्ता में आने से रोकना है तो उत्तर प्रदेश में हार पहली आवश्यकता है. त्यागी ने कहा कि हम चाहते हैं कि धर्मनिरपेक्ष पार्टी जीते, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी फिलहाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का नाम लिए बिना बस शुभकामनाओं तक अपने रोल को सीमित रखा है. बिहार के चुनाव में जीत के बाद नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश में पिछले आठ महीनों के दौरान छह रैलियों को संबोधित किया था और उसके बाद कयास लगाया जा रहा था कि पार्टी उत्तर प्रदेश में कुर्मी और कुशवाहा बहुल क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खड़े करेगी. लेकिन निश्चित रूप से नीतीश कुमार के इस कदम के बाद बिहार में उनके सत्ता के सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस राहत की सांस लेंगे.

राजद ने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार को चुनाव में उम्मीदवार न देने की अपील की थी, लेकिन समाजवादी कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने का अनुरोध भी किया था, लेकिन नीतीश इस बात पर अपनी राय से पार्टी के अन्य नेताओं को अवगत करा दिया है कि जब उत्तर प्रदेश के बीजेपी विरोधी दलों ने कभी किसी मुद्दे पर उनसे विचार-विमर्श नहीं किया तब एकतरफा प्रचार तर्कहीन है. नीतीश निश्चित रूप से अपनी पार्टी के नेताओं शरद यादव और केसी त्यागी से भी खुश नहीं होंगे जिनके ऊपर उत्तर प्रदेश में अन्य पार्टियों से तालमेल का जिम्मा दिया था. हालांकि अजित सिंह के साथ पार्टी ने गठबंधन किया था, लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों में ऐसा माना जा रहा है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में जिसे अजित सिंह का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां जनता दल यूनाइटेड का कोई प्रभाव नहीं है. पिछले विधानसभा चुनावों में जनता दल यूनाइटेड ने 219 उमीदवार खड़े किए थे और उनमें से एक भी उत्तर प्रदेश विधान सभा का मुंह नहीं देख पाया था और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी.

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