नई दिल्ली:
केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संघों के आह्वान पर बुधवार से शुरू हुई दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का मिलाजुला असर रहा। हड़ताल से देश के विभिन्न हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं ठप रहीं और सार्वजनिक परिवहन सेवा बाधित हुईं।
उधर, हिंसा में हरियाणा में एक यूनियन नेता की मौत हो गई जबकि दिल्ली से सटे नोएडा में छिटपुट हिंसा में अनेक कारखाना इकाइयां क्षतिग्रस्त हुईं। केरल, त्रिपुरा और बिहार हड़ताल से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहे जहां जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ जबकि ओड़िशा और कर्नाटक में हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने आईं। कई शहरों में विरोध मार्च निकाले गए।
संप्रग सरकार एवं कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ 11 ट्रेड यूनियन संघों की ओर से आहूत हड़ताल का हवाई उड़ानों और रेल संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।
राज्य की राजधानियों से प्राप्त खबरों में बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं ठप रहीं और बस यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के अंबाला जिला अध्यक्ष इंदर सिंह भडाना ने बताया कि हरियाणा में बस चालक एवं एटक के कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह उस समय मारे गए जब उन्होंने उस बस को रोकने का प्रयास किया जो कि हड़ताल के बावजूद अंबाला डिपो से निकाली जा रही थी। बताया जा रहा है कि उनकी कुछ लोगों ने छूरा घोंपकर हत्या कर दी।
नोएडा फेज दो क्षेत्र स्थित होजरी परिसर में श्रमिक कारखाना मालिकों से भिड़ गए और वाहनों को आग लगा दी। इसके मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र में पीएसी की तैनाती कर दी। पुलिस ने बताया कि श्रमिक भड़क गए और औद्योगिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने बताया कि नोएडा के औद्योगिकी क्षेत्र सेक्टर 82 से ग्रेटर नोएडा से सटे इलाकों तक में श्रमिकों ने एक कार, बस और एक दमकल गाड़ी को आग लगा दी।
एक उद्योगपति ने कहा, ‘‘लोग अंदर घुस आये, लूटपाट की और यहां तक कि हमारे रजिस्टर भी फाड़ दिए।’’ एक अन्य उद्योगपति ने बताया कि होजरी परिसर में प्रत्येक इमारत की खिड़कियां तोड़ दी गईं और कई वाहनों को आग लगा दी गई।
तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल में जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। कोलकाता के कई इलाकों में दुकानें, बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे जबकि सरकार द्वारा संचालित बसें और ट्रॉमों का बड़ी संख्या में संचालन हुआ।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंद के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को चेतावनी दी कि गैरहाजिर रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया राज्य सचिवालय, राइटर्स बिल्डिंग में 100 प्रतिशत उपस्थिति रही।
राष्ट्रीय राजधानी में यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने हड़ताल के समर्थन में अपने वाहन सड़कों पर नहीं उतारे। बस सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुई क्योंकि दिल्ली परिवहन निगम सहित कई बस यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया।
देश के आर्थिक केंद्र मुम्बई में बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों ने हड़ताल में शत-प्रतिशत हिस्सेदारी की जिससे दोनों क्षेत्रों में कामकाज ठप रहा।
उधर, हिंसा में हरियाणा में एक यूनियन नेता की मौत हो गई जबकि दिल्ली से सटे नोएडा में छिटपुट हिंसा में अनेक कारखाना इकाइयां क्षतिग्रस्त हुईं। केरल, त्रिपुरा और बिहार हड़ताल से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहे जहां जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ जबकि ओड़िशा और कर्नाटक में हिंसा की छिटपुट घटनाएं सामने आईं। कई शहरों में विरोध मार्च निकाले गए।
संप्रग सरकार एवं कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ 11 ट्रेड यूनियन संघों की ओर से आहूत हड़ताल का हवाई उड़ानों और रेल संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा।
राज्य की राजधानियों से प्राप्त खबरों में बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं ठप रहीं और बस यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के अंबाला जिला अध्यक्ष इंदर सिंह भडाना ने बताया कि हरियाणा में बस चालक एवं एटक के कोषाध्यक्ष नरेंद्र सिंह उस समय मारे गए जब उन्होंने उस बस को रोकने का प्रयास किया जो कि हड़ताल के बावजूद अंबाला डिपो से निकाली जा रही थी। बताया जा रहा है कि उनकी कुछ लोगों ने छूरा घोंपकर हत्या कर दी।
नोएडा फेज दो क्षेत्र स्थित होजरी परिसर में श्रमिक कारखाना मालिकों से भिड़ गए और वाहनों को आग लगा दी। इसके मद्देनजर प्रशासन ने क्षेत्र में पीएसी की तैनाती कर दी। पुलिस ने बताया कि श्रमिक भड़क गए और औद्योगिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने बताया कि नोएडा के औद्योगिकी क्षेत्र सेक्टर 82 से ग्रेटर नोएडा से सटे इलाकों तक में श्रमिकों ने एक कार, बस और एक दमकल गाड़ी को आग लगा दी।
एक उद्योगपति ने कहा, ‘‘लोग अंदर घुस आये, लूटपाट की और यहां तक कि हमारे रजिस्टर भी फाड़ दिए।’’ एक अन्य उद्योगपति ने बताया कि होजरी परिसर में प्रत्येक इमारत की खिड़कियां तोड़ दी गईं और कई वाहनों को आग लगा दी गई।
तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल में जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ। कोलकाता के कई इलाकों में दुकानें, बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे जबकि सरकार द्वारा संचालित बसें और ट्रॉमों का बड़ी संख्या में संचालन हुआ।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंद के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को चेतावनी दी कि गैरहाजिर रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया राज्य सचिवालय, राइटर्स बिल्डिंग में 100 प्रतिशत उपस्थिति रही।
राष्ट्रीय राजधानी में यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के एक वर्ग ने हड़ताल के समर्थन में अपने वाहन सड़कों पर नहीं उतारे। बस सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुई क्योंकि दिल्ली परिवहन निगम सहित कई बस यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया।
देश के आर्थिक केंद्र मुम्बई में बैंकिंग और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों ने हड़ताल में शत-प्रतिशत हिस्सेदारी की जिससे दोनों क्षेत्रों में कामकाज ठप रहा।
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