New Delhi:
लोकपाल के मुद्दे पर अपने आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे पक्ष के निशाने पर हमेशा संसद सदस्य रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कथित चुप्पी पर भी कई बार निशाना साधा। लेकिन रविवार को आखिरकार जब हजारे ने 12 दिन बाद अपना अनशन तोड़ा तो उनकी टीम ने सांसदों और प्रधानमंत्री का ही सबसे पहले शुक्रिया अदा किया। हजारे ने अनशन तोड़ने के बाद कहा कि वह संसद सदस्यों के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने उनके उठाए मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किया। हजारे ने शनिवार को प्रधानमंत्री का भी आभार जताया था। हजारे पक्ष के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम प्रधानमंत्री और संसद के शुक्रगुजार हैं। लेकिन हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम जन लोकपाल के जरिए किसी संवैधानिक संस्था की मांग नहीं कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि हमारे बारे में कहा गया कि हमने सारे नेताओं को चोर कहा है। हमने ऐसा नहीं कहा। सब नेता चोर नहीं हैं। हमने कभी नहीं कहा कि सब नेता गड़बड़ हैं। अच्छे भी हैं और बुरे भी हैं। गौरतलब है कि लोकपाल के मुद्दे पर अपनी मांगें नहीं माने जाने तक हजारे पक्ष ने संसद सदस्यों की विशेष तौर पर आलोचना की थी। हजारे पक्ष के कई सदस्यों ने कहा था कि संसद सदस्यों को जनता ने चुनकर भेजा है, लेकिन आज वे जनभावना को ही नहीं पहचानना चाहते। वहीं, हजारे ने भी 15 अगस्त से पहले सिंह को कड़े तेवरों वाले अंदाज में पत्र लिखा था और कहा था कि क्या देश का प्रधानमंत्री उन्हें अनशन के लिए दिल्ली में कोई स्थान दिला सकता है। आंदोलन चलाने में पैसे खर्च करने वाले लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अन्ना या हमारे पास इतना पैसा नहीं है। लोगों ने बढ़-चढ़कर इसमें अपने बूते पैसे खर्च किए, लोगों के लिए भोजन, पानी और दवाएं मुहैया कराईं। उन्होंने दिल्ली नगर निगम और जल बोर्ड का भी शुक्रिया अदा किया। केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस का भी शुक्रिया अदा किया और कहा कि उन्होंने कदम-कदम पर सहयोग दिया और जो भी किया अपनी ड्यूटी के तहत किया। उन्होंने कहा कि अन्ना को गिरफ्तार करने वाले कई पुलिसकर्मी बाद में सादी वर्दी में रामलीला मैदान में अनशन का हिस्सा बने।
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