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This Article is From Jul 15, 2014

यह कैसा देश है, जहां मजदूरों का हाथ काट दिया जाता है : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली:

देश के दूसरे राज्यों में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों की हालत पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में दो मजदूरों की हथेलियां काटने से जुड़ी अखबारों में छपी खबरों पर खुद कार्रवाई करते हुए गंभीर टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरह के देश में रहते हैं। ऐसी घटना किसी आदिम देश में भी नहीं होती है। मजदूरों को जानवरों की तरह बसों में ठूंसा जाता है और उन पर अत्याचार होते हैं।

ओडिशा में मजदूरों की हथेलियां काटने से जुड़ी खबर तीन जनवरी को अखबारों में आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में ओडिशा और तेलंगाना सरकारों से भी जवाब तलब है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह इस जघन्य घटना पर क्या कार्रवाई कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में आंध्र प्रदेश में ठेकेदार ने ईंट-भट्टे पर काम करने वाले ओडिशा के दो प्रवासी मजदूरों दियालु और नीलांबर मांझी के दाहिने हाथ काट दिए थे। मजदूरों के हाथ काटने की यह घटना ओडिशा के कालाहांडी जिले के बेलपाड़ा गांव में एक जंगल के पास हुई।

अखबारों में आई खबर के मुताबिक, पीड़ितों में शामिल दियालु ने कहा, उन लोगों ने हमसे पूछा कि तुम्हारा हाथ काटा जाया या पैर। हम उनके सामने गिड़गिड़ाते रहे। मैंने कहा कि हम उधार चुकाने के लिए 10 साल तक काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुना। पहले उन्होंने मेरे सामने नीलांबर मांझी का हाथ काटा और फिर मेरा।'

वहीं नीलांबर मांझी ने बताया, 'मैंने उनसे कहा कि हम बहुत गरीब हैं। उनका पैसा तुरंत नहीं चुका सकते। लेकिन वह पैर या हाथ में से एक को छांटने के लिए कहते रहे। मैंने उन्हें कहा कि मेरा पैर बख्श दो और हाथ काट लो। हमारा हाथ काटने के बाद उन्होंने हमारे खून का अपने सिर पर टीका लगाया और वैन में बैठकर शराब पीने लगे।'

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