
नौकरियों पर रवीश कुमार की सीरीज़ (फाइल फोटो)
देश में नौकरियों पर संकट और बेरोजगारी के बढ़ते हालात पर रवीश कुमार ने एक सीरीज शुरू की है. इसमें वह इसी मसले के इर्द-गिर्द आंकड़ों और जमीनी हकीकत को पेश करते हुए अपनी बात रखत हैं. रवीश कुमार ने पिछले दिनों इस सीरीज की शुरुआत में लिखा, '2014 के चुनावों में वादा किया गया था कि दो करोड़ रोज़गार हर साल पैदा करेंगे. मगर केंद्रीय श्रम मंत्रालय का कोई भी आंकड़ा 10 लाख भी नहीं पहुंचता दिखता है. राज्यों में भी तो श्रम मंत्रालय होंगे, वो क्यों नहीं अपने यहां का आंकड़ा जारी करते हैं. श्रम मंत्रालय का सर्वे हो या आर्थिक सर्वे सबमें रोज़गार की रफ्तार सुस्त होती दिख रही है. अक्सर रोज़गार के जो भी सर्वे आते हैं वो मुख्य रूप से 8 सेक्टरों के होते हैं. मैन्यूफैक्चरिंग, व्यापार, निमार्ण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना, टेक्नालजी, ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्त्रां वगैरह. जुलाई 2014 से दिसंबर 2016 के बीच मात्र 6, 41, 0000 नौकरियां इन सेक्टरों में दी गईं. जुलाई 2011 से दिसंबर 2013 के बीच 12.8 लाख नौकरियां इन सेक्टरों में दी गई थीं. 12 लाख से घटकर हम साढ़े छह लाख पर आ गए हैं. ये श्रम मंत्रालय के सर्वे का ही आंकड़ा हैं जिसे इंडियास्पेंड.कॉम ने छापा है.'
आइए रवीश कुमार के इस मुद्दे से जुड़े सभी ब्लॉग्स और प्राइम टाइम शोज़ पर एक नजर डालें...
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- नौकरियों पर सीरीज़ : नतीजों के लिए लंबा इंतज़ार क्यों?
- सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां- भाग 10
- सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 9
- सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 8
- सरकारी नौकरियां आख़िर हैं कहां - भाग 7
- चयन के बावजूद नौकरी का लंबा इंतज़ार क्यों?
- राज्य चयन आयोगों का नौजवानों से खिलवाड़ क्यों?
- कई राज्य भर्ती बोर्डों के दुष्चक्र में फंसे छात्र
- सरकारी नौकरियां कहां गईं : भाग 3
- राज्य चयन आयोग यूपीएससी से क्यों नहीं सीखते?
- एक करोड़ नौकरियों का वादा कहां गया? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम
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- प्राइम टाइम : सफल उम्मीदवारों में नाम, फिर भी क्यों डरते हैं युवा?
- प्राइम टाइम का असर : सेंट्रल बैंक ने जारी किया अप्वाइटमेंट लेटर
- पास हो चुके हजारों युवक ज्वाइनिंग के इंतजार में
- प्राइम टाइम: देश के युवाओं के सपनों से खिलवाड़ क्यों?
- प्राइम टाइम : नौजवान पीढ़ी के प्रति हमारी क्या जवाबदेही?
- प्राइम टाइम : बेरोज़गारों की सुध आख़िर कौन लेगा?
- प्राइम टाइम: राज्य चयन आयोग यूपीएससी से क्यों नहीं सीखते?
- प्राइम टाइम: कई राज्य भर्ती बोर्डों के दुष्चक्र में फंसे छात्र
- प्राइम टाइम : सरकारी नौकरियां कहां गईं
- प्राइम टाइम : चयन के बावजूद नौकरी का लंबा इंतज़ार क्यों?
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