
प्रतीकात्मक चित्र
भुवनेश्वर:
रसगुल्ला को अपनी खोज के रूप में औपचारिक दावा करने के पश्चिम बंगाल के कदम पर कड़ा ऐतराज करते हुए ओड़िशा के सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) सदस्यों ने गुरुवार को विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और सरकार से राज्य की संस्कृति एवं धरोहर के संरक्षण के लिए कदम उठाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ बीजद सदस्य और पूर्व मंत्री आरपी स्वैन ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘ओड़िशा की धरोहर झपटने की कोशिश हो रही है। जब सभी लोग जानते हैं कि रसगुल्ला सदियों से भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जा रहा है तो कैसे पश्चिम बंगाल सरकार दावा कर सकती है कि यह मिठाई उसकी खोज है।’’
स्वैन ने कहा कि 300 सालों का रिकार्डेड सबूत है कि रसगुल्ला भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता रहा है। ऐसे में उसका मूल ओड़िशा में होने पर कोई संदेह होना ही नहीं चाहिए।
खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रसगुल्ला के जीआई प्रमाणकरण के लिए केंद्रीय समकक्ष से संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू की है कि यह पश्चिम बंगाल का है।’’ अन्य बीजद सदस्यों ने उनका समर्थन किया।
वरिष्ठ बीजद सदस्य और पूर्व मंत्री आरपी स्वैन ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘ओड़िशा की धरोहर झपटने की कोशिश हो रही है। जब सभी लोग जानते हैं कि रसगुल्ला सदियों से भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जा रहा है तो कैसे पश्चिम बंगाल सरकार दावा कर सकती है कि यह मिठाई उसकी खोज है।’’
स्वैन ने कहा कि 300 सालों का रिकार्डेड सबूत है कि रसगुल्ला भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता रहा है। ऐसे में उसका मूल ओड़िशा में होने पर कोई संदेह होना ही नहीं चाहिए।
खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रसगुल्ला के जीआई प्रमाणकरण के लिए केंद्रीय समकक्ष से संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू की है कि यह पश्चिम बंगाल का है।’’ अन्य बीजद सदस्यों ने उनका समर्थन किया।
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