
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे को लेकर एक बार फिर पीएम मोदी को निशाना बनाया.
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने आज राफ़ेल सौदे की जांच की मांग ख़ारिज कर दी. इस सिलसिले में आई सभी अर्ज़ियां रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय रक्षा के मामलों में टीवी इंटरव्यू के आधार पर फैसले नहीं हो सकते. इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस को घेरने में देर नहीं की.
अमित शाह ने कहा, "किसकी सूचना के आधार पर राहुल गांधी इतने बड़े आरोप लगाते थे? आपका सोर्स आफ इन्फॉरमेशन कौन है? देश की जनता ये जानना चाहती है, राहुल गांधी को ये देश को बताना चाहिए."
राहुल गांधी ने जवाब देने में देरी नहीं की. राहुल ने कहा, "ये कैसे हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का फाउंडेशन है कि (राफेल डील की) प्राइसिंग सीएजी की रिपोर्ट में डिस्कस हुई है. लेकिन पीएसी के चेयरमैन को आज तक सीएजी की रिपोर्ट नहीं दिखी. कमेटी में किसी को नहीं दिखी."
राफेल सौदे की जांच पर कोर्ट का फैसला आते ही यह बोले बीजेपी के नेता..
राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी उनके लिए ये मुद्दा बना हुआ है. हालांकि शुक्रवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट ने रफाल से जुड़ी सभी अर्ज़ियां ख़ारिज करते हुए कहा कि उसे तीन मुद्दों- प्रक्रिया, कीमत और ऑफसेट पार्टनर पर विचार करना था.
राफेल पर राहुल गांधी बोले- चौकीदार चोर है और उसने अंबानी को चोरी कराई
कोर्ट ने कहा राफ़ेल सौदे की निर्णय प्रक्रिया सही है. राफ़ेल की क़ीमत में भी कोई गड़बड़ी नहीं लगती. ऑफ़सेट पार्टनर सरकार ने नहीं, दसॉल्ट ने चुना है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में इंटरव्यू के आधार पर फैसला नहीं हो सकता.
कोर्ट के फ़ैसले की छाया संसद के सत्र पर भी दिखी. शोर-शराबे के बीच गृह मंत्री ने भी दुहराया कि इस पर राहुल को माफ़ी मांगनी चाहिए.रिलायंस ग्रुप ने एक बयान जारी कर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया. फैसले से मायूस कांग्रेस ने लेकिन यह साफ किया कि सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति की उसकी मांग बनी रहेगी. लेकिन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस मांग का खारिज कर दिया.
VIDEO : राहुल गांधी बोले चौकीदार ही चोर
कांग्रेस के रूख से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राफेल डील को वह राजनीतिक मुद्दा बनाए रखना चाहती है जबकि सरकार और बीजेपी को राहुल गांधी पर पलटवार करने का एक बड़ा मौका मिल गया है.
अमित शाह ने कहा, "किसकी सूचना के आधार पर राहुल गांधी इतने बड़े आरोप लगाते थे? आपका सोर्स आफ इन्फॉरमेशन कौन है? देश की जनता ये जानना चाहती है, राहुल गांधी को ये देश को बताना चाहिए."
राहुल गांधी ने जवाब देने में देरी नहीं की. राहुल ने कहा, "ये कैसे हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का फाउंडेशन है कि (राफेल डील की) प्राइसिंग सीएजी की रिपोर्ट में डिस्कस हुई है. लेकिन पीएसी के चेयरमैन को आज तक सीएजी की रिपोर्ट नहीं दिखी. कमेटी में किसी को नहीं दिखी."
राफेल सौदे की जांच पर कोर्ट का फैसला आते ही यह बोले बीजेपी के नेता..
राहुल गांधी ने साफ़ कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी उनके लिए ये मुद्दा बना हुआ है. हालांकि शुक्रवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट ने रफाल से जुड़ी सभी अर्ज़ियां ख़ारिज करते हुए कहा कि उसे तीन मुद्दों- प्रक्रिया, कीमत और ऑफसेट पार्टनर पर विचार करना था.
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कोर्ट ने कहा राफ़ेल सौदे की निर्णय प्रक्रिया सही है. राफ़ेल की क़ीमत में भी कोई गड़बड़ी नहीं लगती. ऑफ़सेट पार्टनर सरकार ने नहीं, दसॉल्ट ने चुना है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में इंटरव्यू के आधार पर फैसला नहीं हो सकता.
कोर्ट के फ़ैसले की छाया संसद के सत्र पर भी दिखी. शोर-शराबे के बीच गृह मंत्री ने भी दुहराया कि इस पर राहुल को माफ़ी मांगनी चाहिए.रिलायंस ग्रुप ने एक बयान जारी कर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया. फैसले से मायूस कांग्रेस ने लेकिन यह साफ किया कि सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति की उसकी मांग बनी रहेगी. लेकिन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस मांग का खारिज कर दिया.
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कांग्रेस के रूख से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी राफेल डील को वह राजनीतिक मुद्दा बनाए रखना चाहती है जबकि सरकार और बीजेपी को राहुल गांधी पर पलटवार करने का एक बड़ा मौका मिल गया है.
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