भूमि अधिग्रहण के मामले में केंद्र सरकार ने अपने अध्यादेश का पूरी ताकत से बचाव किया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून राहुल गांधी को खुश करने के लिए लाया गया था, जिसमें कई सारी खामियां थीं, लिहाजा यह अध्यादेश लाना पड़ा।
ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने शुक्रवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि पुराने ज़मीन अधिग्रहण कानून में काफी खामियां थीं। बीरेंद्र सिंह ने कहा, "राहुल गांधी को खुश करने के लिए इतनी सारी गलतियां की गईं...अब हमें वो भुगतना पड़ रहा है।"
ज़मीन अधिग्रहण अध्यादेश का बचाव करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह ने विपक्ष पर राजनीतिक हमला करने के अलावा अलावा प्रशासनिक दलीलें भी दीं। उन्होंने दावा किया कि ये अध्यादेश किसान विरोधी नहीं है, कानून की मूल भावना के साथ है।
बीरेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि जून में ही 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने क़ानून बदलने की मांग की थी और बताया कि अध्यादेश न आता, तो कई कानूनों पर अमल मुश्किल हो जाता।
ग्रामीण विकास मंत्री ने दावा किया कि अगर 31 दिसंबर तक अध्यादेश नहीं लाया जाता, तो 13 महत्वपूर्ण कानूनों को सही तरीके से लागू करना मुश्किल होता। लेकिन बताया जा रहा है कि जमीन अधिग्रहण में छूट की जो नई शर्तें हैं, वे लगभग 70 फ़ीसदी मूल कानून को बदल देंगी।
दूसरा अहम सवाल ये है कि जिस बिल को पूरी संसद ने आम सहमति से कानून की शक्ल दी थी, उसे बिना संसद में लाए क्यों बदल दिया गया। विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने ज़मीन अधिग्रहण अध्यादेश को जायज़ तो ठहराया है, अब उनके सामने अगली चुनौती बजट सत्र में अध्यादेश को संसद की मंजूरी दिलाने की होगी।
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