
बिहार विधानसभा में मंगलवार को एनपीआर पर विशेष चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरे रौ में दिखे. विधानसभा में चर्चा के दौरान जैसे ही विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने उनके ऊपर व्यंग किया कि माननीय मुख्यमंत्री जी का इतिहास रहा है कब कहां पलटी मार दें. तेजस्वी के हमले पर नीतीश कुमार ने तुरंत जवाब देते हुए कहा, "अरे सब बात तो हो ही गया, कहां कोई असहमति है. साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव को कहा कि आपको कुछ बात हम पर नहीं बोलना चाहिए, ये सब बोलने का अधिकार आपके पिताजी को है .समझ गए ना! मत बोला करो अधिक. चलो ये सब केंद्र सरकार ने किया है, हम किए हैं. बैठो बैठो."
हालांकि नीतीश कुमार के बयान पर सदन में सदस्य हंसने लगे. उसके बाद नीतीश कुमार ने जनगणना के दौरान जातिगत जनगणना कराने की मांग रखते हुए फिर से इस पर प्रस्ताव पारित करने की मांग रखी. साथ ही उन्होंने याद भी दिलाया कि सदन से ये प्रस्ताव दो वर्ष पूर्व भी केंद्र सरकार को भेजा गया था. उन्होंने कहा कि अब इसे कराने का वक्त आ गया है.
नीतीश कुमार ने अपने भाषण के दौरान ये बात भी साफ़ की कि NPR और NRC के मुद्दे पर भाजपा के साथ कोई मतभेद नहीं है .उन्होंने एनआरसी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गये भाषण को सुनाया कि इसे लागू करने पर फ़िलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जो पत्र लिखा गया है उसके मंत्री बीजेपी कोटे से ही हैं, इसलिए किसी तरह के विवाद की बात नहीं है.
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हालांकि विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद इस मामले को लेकर श्रेय लेने की होड़ मच गयी. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, "बिहार में NRC/NPR लागू नहीं करने की हमारी मांग पर आज विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कराया गया. NRC/NPR पर एक इंच भी नहीं हिलने वाली BJP को आज हमने 1000 किलोमीटर हिला दिया. BJP वाले माथा पकड़े टुकुर-टुकुर देखते रह गए. संविधान मानने वाले हम लोग CAA भी लागू नहीं होने देंगे."
तेजस्वी यादव ने साथ ही कहा कि 10 दिसंबर को रात 12 बजे जब यह काला क़ानून लोकसभा में पास हुआ था उसके मात्र 9 घंटे बाद सुबह में हम हमारे सभी विधायकों के साथ गांधी जी की मूर्ति के पास धरने पर बैठे थे. उसी दिन हमने आम आवाम से वादा किया था कि चाहे जो भी हो जाए, हमारे रहते इस संविधान विरोधी काले क़ानून को बिहार में लागू नहीं होने देंगे. लगातार सड़क से सदन तक हमारे संघर्ष का परिणाम है कि NDA सरकार को झुकना पड़ा. बिहार ऐसा पहला राज्य है जहां BJP के सरकार में रहते NPR को नए फॉरमेट मे लागू नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया गया. अर्थात 2010 के पुराने फॉरमेट मे ही एनपीआर लागू होगा.
VIDEO: नीतीश कुमार का ऐलान, बिहार में नहीं लागू होगा NRC
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