
झारखंड में खरगोश और चूहे खाकर भूख मिटाने को मजबूर बच्चे
रांची:
झारखंड के राजगढ़ की पहाड़ियों पर एक इलाका ऐसा भी है जहां के बच्चे मिड डे मिल के बजाय चूहे, खरगोश और पक्षी खाते हैं. एनडीटीवी ने राजगढ़ के पहाड़ी इलाकों का जायजा लिया तो यह हकीकत सामने आई. यहां के स्कूलों की हालत बहुत खराब है. स्कूलों से टीचर नदारद हैं. कई बार तो साल में एक-दो बार ही स्कूल आते हैं. यहां के बच्चे संक्रमित खान-पान के चलते बीमार भी पड़ रहे हैं. टीचर नहीं हैं तो साफ है कि मिड डे मील न बन रहा और न ही बच्चों को मिल पा रहा है.
ऐसा भी नहीं है कि इन बच्चों को खरगोश, चूहे और पक्षी बिना कुछ किए खाने को मिल जाएं. इन बच्चों को बकायदा शिकार करना पड़ता है और उसके बाद इन्हें इस तरह का भोजन नसीब होता है. सरकार जहां देशभर में मिड डे मिल चलाने की बात करती है, वहीं झारखंड के इस इलाके की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सरकार अक्सर बयान देती दिखती है कि हमने तो पैसा भेज दिया है, लेकिन बच्चों को मिड डे मील मिल रहा है या नहीं इसकी हकीकत जानना किसी की जिम्मेदारी नहीं है क्या? (VIDEO: NDTV ने इस इलाके का जायजा लिया)
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मिड डे मील में आधार नंबर को लेकर केंद्र सरकार को खासी आलोचना का सामना करना पड़ा. इसके बाद मोदी सरकार ने इस पर यू-टर्न लिया. इसके बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी को भी आधार संख्या के अभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जाएगा और अन्य पहचान प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे. विभिन्न विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसके बाद केंद्र का यह कदम सामने आया था. इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रवृत्तियों और मिड डे मील आदि के लिए आधार को अनिवार्य बनाए जाने की घोषणा की थी.
ऐसा भी नहीं है कि इन बच्चों को खरगोश, चूहे और पक्षी बिना कुछ किए खाने को मिल जाएं. इन बच्चों को बकायदा शिकार करना पड़ता है और उसके बाद इन्हें इस तरह का भोजन नसीब होता है. सरकार जहां देशभर में मिड डे मिल चलाने की बात करती है, वहीं झारखंड के इस इलाके की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. सरकार अक्सर बयान देती दिखती है कि हमने तो पैसा भेज दिया है, लेकिन बच्चों को मिड डे मील मिल रहा है या नहीं इसकी हकीकत जानना किसी की जिम्मेदारी नहीं है क्या? (VIDEO: NDTV ने इस इलाके का जायजा लिया)
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मिड डे मील में आधार नंबर को लेकर केंद्र सरकार को खासी आलोचना का सामना करना पड़ा. इसके बाद मोदी सरकार ने इस पर यू-टर्न लिया. इसके बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी को भी आधार संख्या के अभाव में सब्सिडी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रखा जाएगा और अन्य पहचान प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाएंगे. विभिन्न विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी. इसके बाद केंद्र का यह कदम सामने आया था. इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रवृत्तियों और मिड डे मील आदि के लिए आधार को अनिवार्य बनाए जाने की घोषणा की थी.
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