
चेन्नई:
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता से कहा है कि श्रीलंका में तमिलों को राजनीतिक शक्तियों के विकेंद्रीकरण और सुलह के मसले पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और नई दिल्ली यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि तमिल ‘‘अखंड श्रीलंका में अपने भाग्य के स्वयं मालिक हों।’’
सिंह ने 14 जुलाई को जयललिता द्वारा लिखे पत्र का जवाब देते हुए कहा, श्रीलंका में राजनीतिक शक्तियों के विकेंद्रीकरण और सुलह के प्रश्न को लेकर भारत सरकार के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। उन्होंने कहा, हम लंबे समय से श्रीलंका में ऐसा माहौल बनाए जाने की वकालत कर रहे हैं, जिसमें सभी समुदाय विशेषकर श्रीलंकाई तमिल एक अखंड श्रीलंका में अपने भाग्य के स्वयं मालिक हों। सिंह के पत्र की प्रति राज्य सरकार ने आज जारी की।
जयललिता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में नई दिल्ली से श्रीलंकाई सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाने की अपील की थी कि वह श्रीलंकाई संविधान के 13वें संशोधन को रद्द करने या उसे कमजोर करने के लिए किसी प्रकार से कोई कदम न उठाए।
13वां संशोधन 1987 के भारत और श्रीलंका के समझौते का हिस्सा है, जिसमें प्रांतों को अधिक शक्तियां देने की बात की गई है। ऐसी रिपोर्ट हैं कि श्रीलंकाई सरकार भारत की चिंताओं की बावजूद इसे निरस्त करना चाहती है।
जयललिता ने केंद्र से तमिलों के समर्थन में एक निर्णायक और सुस्पष्ट रुख अपनाने की मांग की थी। उन्होंने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया खतरे में पड़े।
सिंह ने 14 जुलाई को जयललिता द्वारा लिखे पत्र का जवाब देते हुए कहा, श्रीलंका में राजनीतिक शक्तियों के विकेंद्रीकरण और सुलह के प्रश्न को लेकर भारत सरकार के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। उन्होंने कहा, हम लंबे समय से श्रीलंका में ऐसा माहौल बनाए जाने की वकालत कर रहे हैं, जिसमें सभी समुदाय विशेषकर श्रीलंकाई तमिल एक अखंड श्रीलंका में अपने भाग्य के स्वयं मालिक हों। सिंह के पत्र की प्रति राज्य सरकार ने आज जारी की।
जयललिता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में नई दिल्ली से श्रीलंकाई सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाने की अपील की थी कि वह श्रीलंकाई संविधान के 13वें संशोधन को रद्द करने या उसे कमजोर करने के लिए किसी प्रकार से कोई कदम न उठाए।
13वां संशोधन 1987 के भारत और श्रीलंका के समझौते का हिस्सा है, जिसमें प्रांतों को अधिक शक्तियां देने की बात की गई है। ऐसी रिपोर्ट हैं कि श्रीलंकाई सरकार भारत की चिंताओं की बावजूद इसे निरस्त करना चाहती है।
जयललिता ने केंद्र से तमिलों के समर्थन में एक निर्णायक और सुस्पष्ट रुख अपनाने की मांग की थी। उन्होंने केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया खतरे में पड़े।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं